भारत के कथावाचकों की बढ़ती दुनिया— कथावाचन धर्म या धंधा : डॉ. चेतन आनंद
भारत में कथावाचन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा है, जो सदियों से समाज को जोड़ने, अध्यात्म को सरल बनाने और जीवन मूल्यों को स्थापित करने का माध्यम रही है। वेदों-पुराणों में वर्णित कथाएँ, लोक परंपराएँ और भक्ति आंदोलन ने इस कला को समय के साथ और भी समृद्ध किया। किंतु 21वीं सदी …
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