लेख

बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत

भाजपा की बढ़त और तृणमूल की चुनौती पर नया राजनीतिक विश्लेषण डाॅ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार पश्चिम बंगाल की जनता अब केवल भावनात्मक मुद्दों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह उद्योग, रोजगार और बेहतर भविष्य की अपेक्षा कर रही है। लंबे समय तक उद्योगों की कमी और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में …

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हिन्दी का वैश्विक भविष्य: अवसर बड़े, तैयारी अधूरी

हिन्दी आज केवल भारत की सीमाओं में बंधी भाषा नहीं रही, बल्कि वह वैश्विक क्षितिज की ओर तेजी से बढ़ रही है। करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ हिन्दी अब सांस्कृतिक और डिजिटल प्रभाव के जरिए दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। फिर भी सवाल बना हुआ है—क्या हिन्दी वास्तव …

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रहिमन धागा प्रेम का…

“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए,जोड़े  से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाये।” जीहां, ठीक ही कहा है रहीमदास जी ने। कभी हम भी सोचा करते थे कि प्रेम बाँटने से बढ़ता है, इसलिए अपनी परवाह किये  बगैर,अपनी पॉकेट लगातार हल्की करते रहे, अपनी उम्र के अधिकांश कीमती दिन, महीने, घंटे, मिनट्स, यहाँ …

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महात्मा ज्योतिराव फूले: सामाजिक क्रांति के महान अग्रदूत

“भगवान बुद्ध और संत कबीर के बाद महात्मा ज्योतिराव फूले मेरे तीसरे पथ-प्रदर्शक रहे।” — डॉ. भीमराव अंबेडकर 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के महत्व को स्मरण करने का अवसर है। महात्मा ज्योतिराव फूले आधुनिक भारत के ऐसे महान चिंतक थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत, अंधविश्वास …

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महर्षि कश्यप जयंती: समरसता, सृष्टि और संतुलन का शाश्वत संदेश— नरेंद्र कश्यप

लेख – भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति उसकी निरंतरता और अनुकूलनशीलता में निहित है। समय के साथ परिवर्तन को स्वीकार करते हुए भी इस सभ्यता ने अपने मूल मूल्यों—समरसता, संतुलन और सह-अस्तित्व—को कभी नहीं छोड़ा। यही कारण है कि यहाँ के ऋषि-मुनि केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक ही नहीं रहे, बल्कि सामाजिक संरचना, प्रकृति संरक्षण और …

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मज़हबी कट्टरता से निपटने की चुनौती

नफरत नहीं, संवाद और शिक्षा ही बना सकते हैं समरस भारत लेखक: डॉ. अशोक कुमार गदियाचेयरमैन, मेवाड़ यूनिवर्सिटी, चित्तौड़गढ़ पिछले कुछ वर्षों में देश में मज़हबी कट्टरता और नफरत की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है। यह केवल सामाजिक ताने-बाने को ही नहीं तोड़ रही, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा …

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नेताजी के प्रयासों से मिली भारत को आज़ादी

डॉ. अशोक कुमार गदिया 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। भले ही नेताजी लालकिले पर तिरंगा न फहरा सके हों, लेकिन भारत को आज़ादी दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय और अविस्मरणीय है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि नेताजी के बिना स्वतंत्रता संग्राम …

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लोकतंत्र की पाठशाला थे अटल जी

25 दिसंबर | अटल बिहारी वाजपेयी जयंती विशेष भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक सफल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के शिक्षक भी थे। उनके जीवन से जुड़े किस्से आज भी सत्ता, विपक्ष और समाज—तीनों के लिए सीख हैं। शोर-शराबे और कटुता से भरे मौजूदा राजनीतिक माहौल में अटल जी का व्यक्तित्व …

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जानलेवा कोहरा बना राष्ट्रीय चुनौती

लेखभयावह आंकड़े, भारी नुकसान और भविष्य की गंभीर चेतावनीभारत में सर्दी का मौसम आते ही एक अदृश्य लेकिन अत्यंत घातक संकट जन्म लेता है—घना कोहरा। अब यह केवल मौसम की सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। हर वर्ष दिसंबर से जनवरी के बीच देश के अनेक हिस्सों में कोहरा …

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दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई क्यों? — वास्तु के वैज्ञानिक कारण

कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी—समस्त ब्रह्मांड पाँच तत्वों से मिलकर बना है। हमारे ऋषि-मुनियों ने सामान्य जन को समझाने के लिए ब्रह्मांड की शक्तियों को “तत्व” के रूप में परिभाषित किया। वास्तव में प्रत्येक तत्व एक ऊर्जा है। उदाहरण के तौर पर जल कोई तत्व नहीं बल्कि H₂O का यौगिक है, फिर भी उसे “जल तत्व” …

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