रहिमन धागा प्रेम का…
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए,जोड़े से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाये।” जीहां, ठीक ही कहा है रहीमदास जी ने। कभी हम भी सोचा करते थे कि प्रेम बाँटने से बढ़ता है, इसलिए अपनी परवाह किये बगैर,अपनी पॉकेट लगातार हल्की करते रहे, अपनी उम्र के अधिकांश कीमती दिन, महीने, घंटे, मिनट्स, यहाँ …










