Screenshot_20221103-203604_YouTube
IMG-20230215-WA0382
a12
IMG-20230329-WA0101
Final Ad
Screenshot_20251019_113536_OneDrive
screenshot_20260125_230217_gallery4476655999519321620.jpg
PlayPause
previous arrow
next arrow

जानलेवा कोहरा बना राष्ट्रीय चुनौती

Share on facebook
Share on whatsapp
Share on twitter
Share on google
Share on linkedin
डॉ. चेतन आनंद

लेख
भयावह आंकड़े, भारी नुकसान और भविष्य की गंभीर चेतावनी
भारत में सर्दी का मौसम आते ही एक अदृश्य लेकिन अत्यंत घातक संकट जन्म लेता है—घना कोहरा। अब यह केवल मौसम की सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। हर वर्ष दिसंबर से जनवरी के बीच देश के अनेक हिस्सों में कोहरा सड़क, रेल और हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसके कारण सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं।

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
उत्तर भारत कोहरे की मार सबसे अधिक झेलता है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में दृश्यता कई बार 20 से 50 मीटर तक सिमट जाती है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, कानपुर, करनाल, पानीपत, अंबाला, लुधियाना और जालंधर जैसे क्षेत्रों में कोहरे के कारण बार-बार बड़े हादसे हो रहे हैं। उत्तराखंड के रुद्रपुर, काशीपुर और हरिद्वार में भी जनजीवन ठप हो जाता है।

भयावह आंकड़े
सरकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर साल 30 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं कोहरे के कारण होती हैं। सर्दियों में प्रतिदिन औसतन 14 लोगों की जान जाती है। वर्ष 2019 में 35,600 से अधिक हादसे दर्ज किए गए, जबकि 2021 में कोहरे से संबंधित दुर्घटनाओं में 13 हजार से अधिक मौतें हुईं। हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्घटना में 13 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए।

आर्थिक और स्वास्थ्य नुकसान
कोहरे से माल ढुलाई प्रभावित होती है, उद्योग और व्यापार की गति धीमी पड़ जाती है तथा हजारों करोड़ रुपये का अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होता है। प्रदूषण के साथ मिलकर बना स्मॉग दमा, अस्थमा, आंखों की जलन और सांस की समस्याओं को बढ़ा देता है।

भविष्य की चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण आने वाले वर्षों में कोहरे की तीव्रता और अवधि और बढ़ सकती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और भी घातक रूप ले सकता है।

हाइलाइट्स
उत्तर भारत में कोहरा बना जानलेवा संकट
हर साल 30 हजार से अधिक सड़क हादसे
2021 में 13 हजार से ज्यादा मौतें
एक्सप्रेसवे बने सबसे बड़े हादसा क्षेत्र
प्रदूषण से कोहरा और अधिक घातक
सावधानी और जागरूकता ही बचाव का उपाय

लेखक:
डॉ. चेतन आनंद