लेख

महाशिवरात्रि विशेष

विष पीने वाला ही नहीं, विष को रोकने वाला ही है सच्चा शिव आज के दौर में शिवत्व का वास्तविक अर्थ महाशिवरात्रि केवल व्रत, जलाभिषेक और मंदिरों में दर्शन का पर्व नहीं है, बल्कि आत्ममंथन का भी अवसर है। भगवान शिव का संपूर्ण व्यक्तित्व त्याग, धैर्य, करुणा, न्याय और लोककल्याण का प्रतीक है। समुद्र मंथन …

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पेपरलीक पर निर्णायक प्रहार: अब कानून नहीं, सख़्त कार्रवाई की असली परीक्षा

लेखक : डॉ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपरलीक की लगातार बढ़ती घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। ऐसे समय में राजस्थान सरकार द्वारा पेपरलीक माफिया के खिलाफ आजीवन कारावास और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला कठोर कानून लागू करने का …

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युवाओं में बढ़ती हिंसा: क्या हम संवेदनशील समाज से दूर होते जा रहे हैं?

मानसिक स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर गंभीर मंथन की जरूरत भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यही युवा देश के वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में युवाओं से जुड़े जघन्य अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने समाज को गंभीर चिंता में डाल दिया …

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संवेदना का अमर स्वर : महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन की काव्य-यात्रा और जीवन-दर्शन

जन्मदिवस विशेष | 1 जुलाई ‘हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए,ज़िंदगी भोर है, सूरज से निकलते रहिए।’ इन दो पंक्तियों में महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन का संपूर्ण जीवन-दर्शन समाहित है। निराशा के अंधकार में आशा का दीप जलाना, टूटते हुए मनुष्य को जीने का साहस देना और संवेदनाओं को शब्दों की गरिमा …

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विकास की रफ्तार और सुरक्षा की चुनौती: कब तक दरकते रहेंगे हमारे पुल, सड़कें और बांध?

भारत आज विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले डेढ़ दशक में देश ने सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, सुरंग, मेट्रो और बांध जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में ऐतिहासिक प्रगति की है। राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर लगभग 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुंच चुका है, जबकि एक्सप्रेसवे नेटवर्क …

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जब दुनिया को बच्चों की कमी सताने लगी: जनसंख्या विस्फोट से जनसंख्या संकट तक

एक समय था जब बढ़ती जनसंख्या को मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता था। 1968 में अमेरिकी जीवविज्ञानी पॉल एहरलीच ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक द पापुलेशन बम में जनसंख्या विस्फोट की आशंका जताई थी। उस समय विश्व की आबादी लगभग 3.5 अरब थी, लेकिन आज यह 8 अरब से अधिक हो चुकी …

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कानून सख्त, फिर भी सुरक्षित नहीं काला हिरण: छह वर्षों में 114 शिकार और मौतों ने बढ़ाई चिंता

डॉ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) भारत की जैव विविधता में काला हिरण एक विशिष्ट स्थान रखता है। अपनी आकर्षक काया, सर्पिलाकार सींगों और अद्भुत गति के कारण यह देश के सबसे सुंदर वन्यजीवों में गिना जाता है। कभी भारतीय घासभूमियों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले काले हिरणों की आबादी बीसवीं शताब्दी में अंधाधुंध …

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“कला” जीवंत व्यक्तित्व का आभूषण : डॉ. राजेश श्रीवास्तव

यूपी – गाजियाबाद। “कला” मानव जीवन का वह अनमोल आभूषण है जो व्यक्तित्व को न केवल संवारता है बल्कि उसे संवेदनशील और सृजनशील भी बनाता है। सृष्टि की रचना में परमपिता परमेश्वर ने मानव को श्रेष्ठ कृति के रूप में स्थापित कर उसे बुद्धि, विवेक और कला का उपहार दिया है, जिससे वह समाज को …

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आग की लपटों में घिरता एनसीआर: हादसों से सबक कब लेगी व्यवस्था?

करोल बाग से मालवीय नगर तक, हर अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा तंत्र की कमजोरियाँ डाॅ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद देश के सबसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। ऊँची इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और औद्योगिक इकाइयों के बीच विकास …

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धधकते जंगल, सुलगते सवाल

हर साल मई-जून में क्यों जल उठते हैं हिमालय के वन? वनाग्नि के कारण, नुकसान, सरकारी प्रयास और अनुत्तरित प्रश्नों की पड़ताल डाॅ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार -– मई और जून का महीना आते ही हिमालयी राज्यों, विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगलों से धुएँ की खबरें आने लगती हैं। हर वर्ष हजारों …

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