लेख

विकास की रफ्तार और सुरक्षा की चुनौती: कब तक दरकते रहेंगे हमारे पुल, सड़कें और बांध?

भारत आज विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले डेढ़ दशक में देश ने सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, सुरंग, मेट्रो और बांध जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में ऐतिहासिक प्रगति की है। राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर लगभग 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुंच चुका है, जबकि एक्सप्रेसवे नेटवर्क …

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जब दुनिया को बच्चों की कमी सताने लगी: जनसंख्या विस्फोट से जनसंख्या संकट तक

एक समय था जब बढ़ती जनसंख्या को मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता था। 1968 में अमेरिकी जीवविज्ञानी पॉल एहरलीच ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक द पापुलेशन बम में जनसंख्या विस्फोट की आशंका जताई थी। उस समय विश्व की आबादी लगभग 3.5 अरब थी, लेकिन आज यह 8 अरब से अधिक हो चुकी …

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कानून सख्त, फिर भी सुरक्षित नहीं काला हिरण: छह वर्षों में 114 शिकार और मौतों ने बढ़ाई चिंता

डॉ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) भारत की जैव विविधता में काला हिरण एक विशिष्ट स्थान रखता है। अपनी आकर्षक काया, सर्पिलाकार सींगों और अद्भुत गति के कारण यह देश के सबसे सुंदर वन्यजीवों में गिना जाता है। कभी भारतीय घासभूमियों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले काले हिरणों की आबादी बीसवीं शताब्दी में अंधाधुंध …

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“कला” जीवंत व्यक्तित्व का आभूषण : डॉ. राजेश श्रीवास्तव

यूपी – गाजियाबाद। “कला” मानव जीवन का वह अनमोल आभूषण है जो व्यक्तित्व को न केवल संवारता है बल्कि उसे संवेदनशील और सृजनशील भी बनाता है। सृष्टि की रचना में परमपिता परमेश्वर ने मानव को श्रेष्ठ कृति के रूप में स्थापित कर उसे बुद्धि, विवेक और कला का उपहार दिया है, जिससे वह समाज को …

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आग की लपटों में घिरता एनसीआर: हादसों से सबक कब लेगी व्यवस्था?

करोल बाग से मालवीय नगर तक, हर अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा तंत्र की कमजोरियाँ डाॅ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद देश के सबसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। ऊँची इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और औद्योगिक इकाइयों के बीच विकास …

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धधकते जंगल, सुलगते सवाल

हर साल मई-जून में क्यों जल उठते हैं हिमालय के वन? वनाग्नि के कारण, नुकसान, सरकारी प्रयास और अनुत्तरित प्रश्नों की पड़ताल डाॅ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार -– मई और जून का महीना आते ही हिमालयी राज्यों, विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगलों से धुएँ की खबरें आने लगती हैं। हर वर्ष हजारों …

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माँ के दूध तक पहुँचा जहर : पर्यावरणीय संकट की भयावह चेतावनी

– डॉ. चेतन आनंद भारतीय संस्कृति में माँ के दूध को “अमृत” माना गया है, लेकिन यदि उसी दूध में जहरीले तत्व मिलने लगें तो यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि पूरे समाज और पर्यावरण के लिए गंभीर चेतावनी है। बिहार से सामने आई हालिया शोध रिपोर्टों ने इस खतरे को उजागर किया है। पहले …

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प्रवासी भारतीयों की ताकत और आत्मनिर्भर भारत का सपना

भारत आज विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी स्थान बना रहा है। देश की आर्थिक प्रगति, वैश्विक प्रभाव और युवा शक्ति की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन इस विकास यात्रा के पीछे केवल देश के भीतर का उत्पादन और व्यापार ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे करोड़ों भारतीयों का भी …

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राष्ट्रहित से भटकी राजनीति और युवा शक्ति की चुनौती

– डॉ. अशोक कुमार गदिया भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ राजनीति का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, नागरिकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना और राष्ट्र को विकास की दिशा में अग्रसर करना होना चाहिए। किंतु वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आज राजनीति का केंद्र राष्ट्रहित से …

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बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत

भाजपा की बढ़त और तृणमूल की चुनौती पर नया राजनीतिक विश्लेषण डाॅ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार पश्चिम बंगाल की जनता अब केवल भावनात्मक मुद्दों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह उद्योग, रोजगार और बेहतर भविष्य की अपेक्षा कर रही है। लंबे समय तक उद्योगों की कमी और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में …

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