करोल बाग से मालवीय नगर तक, हर अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा तंत्र की कमजोरियाँ
डाॅ. चेतन आनंद
(कवि एवं पत्रकार)
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद देश के सबसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। ऊँची इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और औद्योगिक इकाइयों के बीच विकास की चमक दिखाई देती है, लेकिन इसी चमक के पीछे अग्नि सुरक्षा की गंभीर चुनौतियाँ भी लगातार बढ़ रही हैं।
पिछले एक दशक में बवाना, करोल बाग, अनाज मंडी, मुंडका और हालिया मालवीय नगर अग्निकांड जैसी घटनाओं ने एक समान तस्वीर पेश की है—सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण, विद्युत शॉर्ट-सर्किट और आपातकालीन निकास व्यवस्थाओं की कमी। करोल बाग होटल अग्निकांड में 17, अनाज मंडी हादसे में 43 और मुंडका अग्निकांड में 27 लोगों की जान गई। जून 2026 में मालवीय नगर स्थित होटल-रेस्तरां परिसर में लगी आग में 21 लोगों की मौत ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश अग्निकांडों की जड़ में विद्युत शॉर्ट-सर्किट, ओवरलोडिंग, ज्वलनशील सामग्री का असुरक्षित भंडारण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी होती है। अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ आर.सी. शर्मा का कहना है कि आग से होने वाली अधिकांश मौतें धुएँ और दम घुटने के कारण होती हैं, जबकि सुरक्षित निकास मार्ग और कार्यशील अलार्म सिस्टम बड़ी संख्या में जानें बचा सकते हैं।
दिल्ली ही नहीं, पूरा एनसीआर जोखिम के दायरे में है। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम की हाईराइज सोसायटियों में लगातार सामने आ रही आग की घटनाएँ बताती हैं कि बहुमंजिला इमारतों में स्थापित सुरक्षा उपकरणों का रखरखाव अक्सर उपेक्षित रहता है। कई स्थानों पर आपातकालीन निकास मार्ग भी अवरुद्ध पाए जाते हैं।
सरकारों ने दमकल सेवाओं के आधुनिकीकरण, नए उपकरणों और विशेष निरीक्षण अभियानों की शुरुआत की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल संसाधन बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नियमित फायर ऑडिट, विद्युत प्रणाली की समय-समय पर जांच, मॉक ड्रिल, सुरक्षा प्रशिक्षण और नियमों का कठोर अनुपालन ही वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर के अग्निकांड केवल दुर्घटनाएँ नहीं, बल्कि हमारी शहरी व्यवस्था की कमजोरियों का आईना हैं। यदि सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू नहीं किया गया और निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं हुई, तो विकास की यह चमक भविष्य में और बड़े हादसों की कीमत पर हासिल होती दिखाई दे सकती है। आग लगने के बाद राहत पहुँचाना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी है आग लगने की नौबत ही न आने देना।






