लेख

9 दिन, 9 शक्तियाँ, 9 संकल्प

नवरात्रि : आत्मशक्ति के जागरण से व्यक्तित्व निर्माण तक लेखक : डॉ. चेतन आनंद (कवि एवं पत्रकार) नवरात्रि केवल पूजा, उपवास और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशक्ति के जागरण और जीवन को श्रेष्ठ दिशा देने का अवसर भी है। भारतीय संस्कृति में शक्ति की उपासना का अर्थ केवल देवी के समक्ष शीश झुकाना …

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कवि सम्मेलन पिकनिक नहीं, पाठशाला है

कवि सम्मेलन भारतीय साहित्यिक परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली मंच रहा है। यह केवल कविता सुनने-सुनाने का आयोजन नहीं, बल्कि भाषा, साहित्य, संस्कार, संवेदना और सामाजिक चेतना का जीवंत उत्सव हुआ करता था। कवि सम्मेलन में कवि अपनी रचना लेकर आता था, लेकिन साथ ही वह दूसरे कवियों को सुनने, उनसे सीखने और …

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सत्य निकेतन से गाजियाबाद-नोएडा तक कब्जों और अवैध निर्माण ने कितनी बड़ी कीमत वसूली?

सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन का भरभराकर गिरना केवल एक इमारत का हादसा नहीं है। यह दिल्ली-एनसीआर के उस शहरी विकास मॉडल पर गंभीर सवाल है, जिसमें आवासीय मकान पीजी बन जाते हैं, स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलें खड़ी हो जाती हैं, बेसमेंट का उपयोग बदल जाता है और सरकारी अथवा ग्रीन बेल्ट …

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राष्ट्र निर्माण के लिए चाहिए कर्मठ अध्यापक

शिक्षक दिवस, 5 सितम्बर पर विशेष भारत आज युवा देश है। 15 से 25 वर्ष की आयु के करोड़ों युवा हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं। यही युवा आने वाले भारत की दिशा और दशा तय करेंगे। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित प्रशिक्षण, संस्कार और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज …

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बदलते समय में रक्षा के अर्थ की तलाश

रक्षाबंधन पर्व पर विशेष लेखलेखक : डॉ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार रक्षाबंधन को सामान्यतः भाई-बहन के प्रेम का पर्व कहा जाता है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। लेकिन यदि इस पर्व को केवल इसी परंपरा तक सीमित कर दें तो इसके व्यापक अर्थ …

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महाशिवरात्रि विशेष

विष पीने वाला ही नहीं, विष को रोकने वाला ही है सच्चा शिव आज के दौर में शिवत्व का वास्तविक अर्थ महाशिवरात्रि केवल व्रत, जलाभिषेक और मंदिरों में दर्शन का पर्व नहीं है, बल्कि आत्ममंथन का भी अवसर है। भगवान शिव का संपूर्ण व्यक्तित्व त्याग, धैर्य, करुणा, न्याय और लोककल्याण का प्रतीक है। समुद्र मंथन …

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पेपरलीक पर निर्णायक प्रहार: अब कानून नहीं, सख़्त कार्रवाई की असली परीक्षा

लेखक : डॉ. चेतन आनंद(कवि एवं पत्रकार) देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपरलीक की लगातार बढ़ती घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। ऐसे समय में राजस्थान सरकार द्वारा पेपरलीक माफिया के खिलाफ आजीवन कारावास और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला कठोर कानून लागू करने का …

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युवाओं में बढ़ती हिंसा: क्या हम संवेदनशील समाज से दूर होते जा रहे हैं?

मानसिक स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर गंभीर मंथन की जरूरत भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यही युवा देश के वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में युवाओं से जुड़े जघन्य अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने समाज को गंभीर चिंता में डाल दिया …

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संवेदना का अमर स्वर : महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन की काव्य-यात्रा और जीवन-दर्शन

जन्मदिवस विशेष | 1 जुलाई ‘हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए,ज़िंदगी भोर है, सूरज से निकलते रहिए।’ इन दो पंक्तियों में महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन का संपूर्ण जीवन-दर्शन समाहित है। निराशा के अंधकार में आशा का दीप जलाना, टूटते हुए मनुष्य को जीने का साहस देना और संवेदनाओं को शब्दों की गरिमा …

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विकास की रफ्तार और सुरक्षा की चुनौती: कब तक दरकते रहेंगे हमारे पुल, सड़कें और बांध?

भारत आज विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले डेढ़ दशक में देश ने सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, सुरंग, मेट्रो और बांध जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में ऐतिहासिक प्रगति की है। राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर लगभग 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुंच चुका है, जबकि एक्सप्रेसवे नेटवर्क …

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