लेख

माँ के दूध तक पहुँचा जहर : पर्यावरणीय संकट की भयावह चेतावनी

– डॉ. चेतन आनंद भारतीय संस्कृति में माँ के दूध को “अमृत” माना गया है, लेकिन यदि उसी दूध में जहरीले तत्व मिलने लगें तो यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि पूरे समाज और पर्यावरण के लिए गंभीर चेतावनी है। बिहार से सामने आई हालिया शोध रिपोर्टों ने इस खतरे को उजागर किया है। पहले …

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प्रवासी भारतीयों की ताकत और आत्मनिर्भर भारत का सपना

भारत आज विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी स्थान बना रहा है। देश की आर्थिक प्रगति, वैश्विक प्रभाव और युवा शक्ति की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन इस विकास यात्रा के पीछे केवल देश के भीतर का उत्पादन और व्यापार ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे करोड़ों भारतीयों का भी …

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राष्ट्रहित से भटकी राजनीति और युवा शक्ति की चुनौती

– डॉ. अशोक कुमार गदिया भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ राजनीति का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, नागरिकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना और राष्ट्र को विकास की दिशा में अग्रसर करना होना चाहिए। किंतु वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आज राजनीति का केंद्र राष्ट्रहित से …

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बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत

भाजपा की बढ़त और तृणमूल की चुनौती पर नया राजनीतिक विश्लेषण डाॅ. चेतन आनंद, कवि एवं पत्रकार पश्चिम बंगाल की जनता अब केवल भावनात्मक मुद्दों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह उद्योग, रोजगार और बेहतर भविष्य की अपेक्षा कर रही है। लंबे समय तक उद्योगों की कमी और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में …

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हिन्दी का वैश्विक भविष्य: अवसर बड़े, तैयारी अधूरी

हिन्दी आज केवल भारत की सीमाओं में बंधी भाषा नहीं रही, बल्कि वह वैश्विक क्षितिज की ओर तेजी से बढ़ रही है। करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ हिन्दी अब सांस्कृतिक और डिजिटल प्रभाव के जरिए दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। फिर भी सवाल बना हुआ है—क्या हिन्दी वास्तव …

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रहिमन धागा प्रेम का…

“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए,जोड़े  से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाये।” जीहां, ठीक ही कहा है रहीमदास जी ने। कभी हम भी सोचा करते थे कि प्रेम बाँटने से बढ़ता है, इसलिए अपनी परवाह किये  बगैर,अपनी पॉकेट लगातार हल्की करते रहे, अपनी उम्र के अधिकांश कीमती दिन, महीने, घंटे, मिनट्स, यहाँ …

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महात्मा ज्योतिराव फूले: सामाजिक क्रांति के महान अग्रदूत

“भगवान बुद्ध और संत कबीर के बाद महात्मा ज्योतिराव फूले मेरे तीसरे पथ-प्रदर्शक रहे।” — डॉ. भीमराव अंबेडकर 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के महत्व को स्मरण करने का अवसर है। महात्मा ज्योतिराव फूले आधुनिक भारत के ऐसे महान चिंतक थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत, अंधविश्वास …

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महर्षि कश्यप जयंती: समरसता, सृष्टि और संतुलन का शाश्वत संदेश— नरेंद्र कश्यप

लेख – भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति उसकी निरंतरता और अनुकूलनशीलता में निहित है। समय के साथ परिवर्तन को स्वीकार करते हुए भी इस सभ्यता ने अपने मूल मूल्यों—समरसता, संतुलन और सह-अस्तित्व—को कभी नहीं छोड़ा। यही कारण है कि यहाँ के ऋषि-मुनि केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक ही नहीं रहे, बल्कि सामाजिक संरचना, प्रकृति संरक्षण और …

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मज़हबी कट्टरता से निपटने की चुनौती

नफरत नहीं, संवाद और शिक्षा ही बना सकते हैं समरस भारत लेखक: डॉ. अशोक कुमार गदियाचेयरमैन, मेवाड़ यूनिवर्सिटी, चित्तौड़गढ़ पिछले कुछ वर्षों में देश में मज़हबी कट्टरता और नफरत की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है। यह केवल सामाजिक ताने-बाने को ही नहीं तोड़ रही, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा …

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नेताजी के प्रयासों से मिली भारत को आज़ादी

डॉ. अशोक कुमार गदिया 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। भले ही नेताजी लालकिले पर तिरंगा न फहरा सके हों, लेकिन भारत को आज़ादी दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय और अविस्मरणीय है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि नेताजी के बिना स्वतंत्रता संग्राम …

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