“”प्रिय कैसा है तेरा प्यार””
कैसे बताऊँ मैं,प्रिय कैसा है तेरा प्यार.,कोई जादू है या प्रभु का उपहार,जैसे तपती धरती पर हो बूँदों की बौछार,सूनेपन में बजी हो पायल की झनकार,सूखे रेगिस्तान में जैसेआई बसंत ऋतु की बाहर,अमावस की काली रात,प्रातः हुआ हो सूरजका दीदार,जैसे बिन पानी तड़फती मछली को,सागर मिल गया हो,टूटे दिल का तेरे दर्श से तन मन …










