
2003 में पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों का आदेश पहले जारी करने की मांग
यूपी – गाजियाबाद। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने प्रोन्नत वेतनमान के स्वीकृति आदेश में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए बुधवार, 14 अक्टूबर को सिटी मजिस्ट्रेट सतीश चंद्र त्रिपाठी को शिकायत पत्र सौंपा। संघ ने आदेश निरस्त कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
जिला महामंत्री डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि इससे पहले 11 सितंबर को ईमेल के माध्यम से और 25 सितंबर को अपर जिलाधिकारी को पत्र देकर शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। संघ के अनुसार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के 24 जुलाई 2026 के पत्र के अनुपालन में जारी आदेश में वर्ष 2004 में पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों का आदेश पहले जारी किया गया, जबकि वर्ष 2003 में पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों का आदेश पहले जारी होना चाहिए था।
संघ ने शासनादेश के अनुसार चयन वेतनमान के लिए एक पद पर 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा तथा प्रोन्नत वेतनमान के लिए चयन वेतनमान मिलने के बाद 12 वर्ष की निरंतर संतोषजनक सेवा का नियम बताया। साथ ही संवर्ग के स्वीकृत पदों के 20 प्रतिशत की सीमा का हवाला दिया।
जिला अध्यक्ष दर्शन कुमार बंसल, जिला महामंत्री डॉ. प्रवीण कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार और गाजियाबाद अध्यक्ष राजपाल सिंह ने शिकायत पत्र देकर आदेश निरस्त करने तथा पहले 2003 और उसके बाद 2004 में पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों के आदेश जारी करने की मांग की। शिकायत की प्रतिलिपि महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय और सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रथम, मेरठ मंडल को भी भेजी गई।

