
27 साल पुरानी संस्था में चुनाव प्रक्रिया को लेकर दो गुट आमने-सामने, सुबह से शाम तक चलता रहा विवाद
यूपी – गाजियाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुराछात्र संघ (अउआ) की सालाना आम बैठक (एजीएम) में नई कार्यकारिणी के चुनाव को लेकर जमकर हंगामा हुआ। होटल कृष्णा सागर में आयोजित बैठक में चुनाव प्रक्रिया पर सहमति नहीं बन सकी और कई घंटे चले विवाद के बाद चुनाव टल गया। दूर-दराज के शहरों से आए पूर्व छात्र निराश होकर लौट गए। बैठक के दौरान संस्था के दो धड़ों में बंटने की स्थिति भी बन गई।

नई कार्यकारिणी के चुनाव के लिए पूर्व पीसीएस जे. सिंह की अध्यक्षता में अधिवक्ता दिनेश श्रीवास्तव और प्रतीक बिल्डर्स के प्रबंधक आलोक सिन्हा की चुनाव समिति बनाई गई थी। समिति ने पहले 15 और बाद में 26 सितंबर तक ऑनलाइन नामांकन मांगे थे। इसी दौरान दिनेश श्रीवास्तव ने चुनाव समिति से इस्तीफा देकर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कर दिया। निवर्तमान अध्यक्ष पूर्व आईएएस एसके सिंह ने भी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उज्जवल कुमार ने अध्यक्ष पद के दोनों दावेदारों के बीच सहमति बनने पर अपना नामांकन वापस लेने की बात कही।
महासचिव पद के लिए उत्तराखंड से प्रो. अमित जायसवाल और लखनऊ से अधिवक्ता अमित सिंह ने नामांकन किया था। चुनाव अधिकारी जे. सिंह ने सभी प्रत्याशियों से आपसी सहमति बनाने की अपील की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। बैठक में मौजूद सदस्य दो गुटों में बंट गए। एक पक्ष एसके सिंह को दोबारा अध्यक्ष बनाने के पक्ष में दिखाई दिया, जबकि पूर्व पीसीएस राजकुमार सचान का गुट दिनेश श्रीवास्तव के समर्थन में था।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब पूर्व महासचिव शीतलाशंकर विजय मिश्र मंच पर बैठ गए और माइक संभालते हुए चुनाव स्थगित कर फरवरी में दोबारा सालाना बैठक बुलाने की घोषणा कर दी। दूर-दराज से आए सदस्यों ने मौके पर ही चुनाव कराने की मांग की। इस पर सचान गुट की ओर से चुनाव के बजाय मनोनयन की बात कही गई। निवर्तमान महासचिव डॉ. शिखा दरबारी ने नामांकन मान्य नहीं होने की बात कही और खुद को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिसका सदस्यों ने विरोध किया।
बैठक में अजय औदीच्य, उज्जवल कुमार और ब्रजेश शुक्ला को नियमानुसार निर्विरोध उपाध्यक्ष घोषित करने की मांग भी उठी, लेकिन इसका भी विरोध किया गया। सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक में शाम पांच बजे तक विवाद और हंगामा चलता रहा। अंततः चुनाव नहीं हो सका।
मौके पर मौजूद कई पूर्व छात्रों ने अलग अखिल भारतीय संस्था बनाने की बात कही। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि हाथापाई की नौबत आते-आते बची। मंच पर मौजूद अउआ के वरिष्ठ सदस्य पूर्व आईएएस सीपी पांडे, उषारमण त्रिपाठी और डीके राय ने पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताते हुए मंच छोड़ दिया।
बैठक में एसके सिंह, डॉ. शिखा दरबारी, अजय औदीच्य, आदेश शर्मा, अखिलेश शर्मा, रमेश शर्मा, आलोक सिन्हा, प्रो. अमित जायसवाल, अमित सिंह, अमिताभ तिवारी, बीएन सिंह, ब्रजेश शुक्ला, दीप वर्धन, दिग्विजय कुमार सिंह, डीसी श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा, ज्ञानप्रकाश पांडे, डॉ. कुलभूषण त्रिपाठी, अधिवक्ता हाईकोर्ट प्रदीप कुमार तिवारी, राजेन्द्र सिंह असवाल, राजकुमार सचान, रजनीश कर्णवाल, श्रवण कुमार, शीतलाशंकर विजय मिश्र, सुशील अवस्थी, उज्जवल कुमार, विवेक मिश्रा समेत 40 से अधिक आजीवन सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में अधिवक्ता रमेश शर्मा को छोड़कर बड़ी संख्या में सदस्य विवाद के दौरान अपनी-अपनी बात रखते नजर आए।

