पूर्व छात्रों ने मनाया विश्वविद्यालय का 139वां स्थापना दिवस

– वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सुनाए अपने संस्मरण

– कुलगीत गाकर की कार्यक्रम की शुरुआत


यूपी – गाजियाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना के गौरवशाली 139 वर्ष पूरे होने की खुशी में देर शाम पूर्व छात्र-छात्राओं ने आॅनलाइन स्थापना महोत्सव मनाया। इस मौके पर उन्होंने विश्वविद्यालय में बिताए अपने संस्मरण सुनाए और यूनिवर्सिटी के लोगो में अंकित वटवृक्ष की संकल्पना का सार बताया। इस समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व छात्रों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि विश्वविद्यालय छात्रसंघ के 1963 में अध्यक्ष रहे श्यामकृष्ण पाण्डेय थे। प्रो. अमित जायसवाल के आयोजित और संचालित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विश्वविद्यालय के गौरवशाली अतीत के साथ ही भविष्य को भी रेखांकित किया। उन्होंने वर्तमान छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे ‘जितनी शाखाएं उतने ही वृक्ष’ की संकल्पना को साकार करें। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दिनों के रोमांचक किस्से सुनाए। पूर्व कुलपति महू (मध्यप्रदेश) की प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि विचारों में दृढ़ता और निडरता की प्रेरणा उन्होंने विश्वविद्यालय से ही प्राप्त की। अउआ के अध्यक्ष आईएएस एसके सिंह ने कहा कि हमें बेरोजगार पूर्वछात्रों के लिये सकारात्मक योजना बनानी होगी। कार्यक्रम में नागालैंड से जुड़े प्रो. ज्ञानेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय की ही देन है कि पूर्व छात्र हर वर्ष स्थापना दिवस मनाकर अपने अल्मामीटर को लेकर यह चिंतन करते हैं कि कैसे इसे शीर्ष स्थान पर बनाए रखा जाए।


वरिष्ठ पत्रकार अजय आॅदीच्य ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें ज्ञान देने के साथ ही स्वावलम्बन की प्रेरणा दी। देहरादून से जुड़े अनुज रवि त्यागी व डॉ. स्तुति श्रीवास्तव, झांसी से डॉ. जीतेंद्र प्रताप ने भी अपने अनुभव व संस्मरण साझा किये। बरेली से डॉ. कुलभूषण त्रिपाठी ने अपने तरन्नुम से प्रसिद्ध कवि दुष्यंत की पंक्तियों से विश्वविद्यालय की यादों को जोड़ा। भदोही से जुड़े डॉ. प्रतीक उपाध्याय ने कहा कि जीवन गढ़ने की सीख जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय देता है, वह अन्य कहीं नहीं मिलती।  
प्रो. अरविंद अवस्थी ने कहा कि जब जब जरूरत होगी, हम विश्वविद्यालय की बेहतरी और पूर्व छात्रों की मदद के लिए आगे आएंगे। विनोद त्रिपाठी ने पूर्वछात्रों को एक मंच पर जोड़ने और तकनीकी माध्यमों का उपयोग करने की जरूरत बताई। एडवोकेट हाईकोर्ट प्रदीप तिवारी ने अपने अनुभव साझा करने के साथ ही मुख्य अतिथि का स्वागत परिचय दिया। कार्यक्रम में सऊदी अरब से प्रो. आलोक तिवारी, कर्णप्रयाग से डॉ. इन्द्रेश कुमार पांडेय, दिल्ली से डॉ प्रेरणा मध्यान्ह छाबड़िया, डॉ. जलज त्रिपाठी व सुप्रीम कोर्ट के वकील उज्जवल कुमार, प्रयागराज से डॉ. संजय दुबे सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए।