
यूपी – गाजियाबाद। 1984 सिख न्याय एवं अधिकार मंच ने गाजियाबाद में वर्ष 1984 के दौरान सिख समाज के साथ हुई हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष पुनः जांच कराने की मांग की है। मंच ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से पुराने एफआईआर, पुलिस रिकॉर्ड, केस डायरी, अंतिम रिपोर्ट तथा न्यायालयीन अभिलेखों की समीक्षा कराने की मांग की।
मंच का कहना है कि राजनगर क्षेत्र में 1 नवंबर 1984 को सिख परिवारों के साथ हुई हिंसा और गुरुद्वारा साहिब को जलाए जाने जैसी घटनाओं सहित हत्या, आगजनी, लूटपाट और अन्य हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में यदि जांच अधूरी रही हो तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। मंच ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करना या किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
मंच ने मांग की कि आवश्यकता के अनुसार मामलों की जांच सीबीआई अथवा स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए। पीड़ित परिवारों, प्रत्यक्षदर्शियों और गवाहों के बयान तथा पुराने दस्तावेजों और हलफनामों की भी समीक्षा करने की मांग की गई। साथ ही पीड़ित परिवारों को नियमानुसार न्याय एवं सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।
प्रेस वार्ता में चेयरमैन सरदार हरमीत सिंह, प्रधान इंदरजीत सिंह टीटू, महामंत्री एसपी सिंह ओबेराय, सचिव कुलविंदर सिंह ओबेराय, जस्मित सिंह, जगमोहन कपूर, हरपाल सिंह भुई, गुरमीत सिंह खोसला, उपाध्यक्ष जी ब्लॉक, जसबीर सिंह बत्रा, उपाध्यक्ष सी ब्लॉक, जगदीप सिंह खोसला, जोगिंदर सिंह और बग्गु जी प्रधान भूड़ भारत नगर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मंच ने कहा कि चार दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद पीड़ित परिवारों के न्याय का प्रश्न महत्वपूर्ण है और कानून के शासन के तहत निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

