
ईज ऑफ डूइंग मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देने और औद्योगिक उत्पीड़न रोकने की मांग
यूपी – गाजियाबाद। प्रदेश में औद्योगिक विकास के दावों के बीच एमएसएमई उद्यमियों की बढ़ती समस्याओं को लेकर गाजियाबाद के औद्योगिक संगठनों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। संगठनों का कहना है कि सड़क, सुरक्षा और बिजली जैसी सुविधाओं से औद्योगिक विकास को गति मिली है, लेकिन उद्योग चलाने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए शासन गंभीर नहीं है।
ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गेनाइजेशन के उत्तर प्रदेश स्टेट बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र गोयल ने बताया कि प्रदूषण विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की कार्रवाई से उद्यमी परेशान हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सख्त नियमों के कारण भी उद्योगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उद्यमियों ने औद्योगिक भूमि के विकास शुल्क में असमानता समाप्त करने, बीमार इकाइयों के पुनर्वास की नीति बनाने, किराये पर औद्योगिक भूमि और शेड उपलब्ध कराने तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि वेयरहाउसिंग जैसी गतिविधियों को भी औद्योगिक गतिविधि का दर्जा दिया जाना चाहिए।
इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, हिंदू इकोनॉमिक फोरम (गाजियाबाद चैप्टर) के अध्यक्ष संजीव सचदेव, ऑल इंडिया मेटल फोर्जिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश अग्रवाल और उत्तर प्रदेश उद्यमी विकास संघ के महामंत्री मनोज शर्मा ने कहा कि पिछले दो वर्षों से मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
संगठनों ने सरकार से उद्यमियों की समस्याएं सुनकर नीतियों में आवश्यक बदलाव करने और उद्योगों का उत्पीड़न तत्काल बंद करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश के उद्यमी एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

