मेवाड़ विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को देगा निःशुल्क उच्च शिक्षा : डॉ. अशोक कुमार गदिया

राजस्थान-चित्तौड़गढ़ आर्थिक रूप से कमजोर कोई भी बच्चा उच्च शिक्षा से वंचित न रहे, इस संकल्प के साथ मेवाड़ विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने एक बार फिर जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों से युक्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर युवाओं का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

गरीब विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क शिक्षा

डॉ. अशोक कुमार गदिया ने बताया कि जिले का कोई भी आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता है तो उसे मेवाड़ विश्वविद्यालय में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए संबंधित विद्यार्थी को अपने क्षेत्र के सरपंच एवं जाति पंचायत के मुखिया से आर्थिक स्थिति का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पहले से ही ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत या उससे अधिक छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है।

एक हजार स्कूलों में होगी करियर काउंसलिंग

डॉ. अशोक कुमार गदिया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के बाद उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी नहीं होती। इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय जिले सहित विभिन्न क्षेत्रों के करीब एक हजार विद्यालयों में करियर काउंसलिंग अभियान चलाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी जाएगी।

देशभर के विद्यार्थियों को मिल रहा लाभ

उन्होंने बताया कि मेवाड़ विश्वविद्यालय में जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, असम, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इन्हें विभिन्न संकायों में 50 प्रतिशत अथवा उससे अधिक छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। विश्वविद्यालय ने नाइजीरिया सहित विदेशों में भी अपनी पहचान स्थापित की है तथा जम्मू-कश्मीर में भी अपने शैक्षणिक विस्तार की शुरुआत कर दी है।

लड़कियों के लिए विशेष व्यवस्था

डॉ. अशोक कुमार गदिया ने बताया कि चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ गर्ल्स कॉलेज में आर्थिक रूप से कमजोर एवं पिछड़े वर्ग की लगभग एक हजार छात्राओं को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार एवं स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जाता है।

स्किल डेवलपमेंट के साथ रोजगार

विश्वविद्यालय में स्थापित स्किल डेवलपमेंट सेंटर में 78 प्रकार के रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में 200 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाता है तथा प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता और प्रशिक्षण पूर्ण होने पर दो हजार रुपये का वजीफा भी दिया जाता है। यह कार्यक्रम भारत सरकार की रोजगारपरक योजनाओं के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं।

शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण

डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए महापुरुषों की जयंती, राष्ट्रीय पर्व, सेमिनार, कार्यशालाएं, नाटक एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना है।

प्रशिक्षण और प्लेसमेंट पर विशेष जोर

विश्वविद्यालय के प्रत्येक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को 21 से 45 दिन का औद्योगिक प्रशिक्षण कराया जाता है। अंतिम सेमेस्टर में कम से कम छह माह की इंटर्नशिप अनिवार्य है। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों को कैंपस प्लेसमेंट के लिए आमंत्रित किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी होने के साथ ही रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

विश्वगुरु बनने की दिशा में शिक्षा जरूरी

डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब देश का युवा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ेगा, तभी भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा।