लखनऊ अग्निकांड: केवल शोक नहीं, जवाबदेही और नीतिगत सुधार की भी जरूरत — सत्येन्द्र सिंह

यूपी – गाजियाबाद। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (आईसीआईएम) के चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि देश की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

उन्होंने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि केवल दुख प्रकट करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस त्रासदी से सबक लेकर ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

सत्येन्द्र सिंह ने सवाल उठाया कि जिन इमारतों में अग्नि सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का पालन नहीं होता, उनका निर्माण कैसे हो जाता है। उन्होंने पूछा कि क्या निर्माण के समय संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी निरीक्षण किया जाता है और यदि किया जाता है तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे सामने आती है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बिना फायर एनओसी अथवा सुरक्षा उपकरणों वाले भवनों के विरुद्ध समय-समय पर क्या कार्रवाई की जाती है तथा क्या दोषी अधिकारियों और भवन स्वामियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होती है।

उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की एसआईटी से निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषी अधिकारियों, भवन मालिकों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए फायर सेफ्टी नियमों को और अधिक प्रभावी एवं सख्ती से लागू किया जाए।

सत्येन्द्र सिंह ने सुझाव दिया कि अस्पतालों, होटलों, मॉल, स्कूलों, कोचिंग सेंटरों, फैक्ट्रियों, कार्यालयों तथा बहुमंजिला भवनों का नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाए। फायर एनओसी की ऑनलाइन निगरानी, थर्ड पार्टी ऑडिट और नियमों का उल्लंघन करने वाले भवनों को तत्काल सील करने जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं। उन्होंने आम नागरिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए नियमित फायर सेफ्टी प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल अनिवार्य करने की भी वकालत की।

उन्होंने कहा कि छोटे व्यवसायियों, अस्पतालों, स्कूलों और एमएसएमई इकाइयों के लिए अग्नि सुरक्षा उपकरणों की लागत एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सरकार को इन उपकरणों पर जीएसटी एवं अन्य करों में राहत देने, सब्सिडी अथवा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा गुणवत्तापूर्ण अग्नि सुरक्षा उपकरण सुलभ और उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। यदि हर हादसे के बाद केवल जांच और बयानबाजी तक ही कार्रवाई सीमित रही तो भविष्य में ऐसी त्रासदियां दोहराई जाती रहेंगी। उन्होंने सभी से अग्नि सुरक्षा को केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का आह्वान किया।