यूपी – गाजियाबाद | 28 जनवरी शहरी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम उठाया है। इसके अंतर्गत प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई प्रमुख आवासीय योजनाओं, मुख्य मार्गों तथा आधारभूत ढांचा परिसंपत्तियों का विधिवत हस्तांतरण संबंधित निकाय को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपन्न कराया गया।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा जिन प्रमुख परिसंपत्तियों का हस्तांतरण किया गया, उनमें स्वर्णजयंतीपुरम, कर्पूरीपुरम (बी-ब्लॉक), भाऊराव देवरस योजना (केए एवं केबी ब्लॉक), प्रताप विहार, गोविन्दपुरम (सी.पी. ब्लॉक), राजनगर एक्सटेंशन का मुख्य बंधा रोड तथा मधुबन बापूधाम स्थित 56 एम.एल.डी. क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) शामिल हैं।
यह संपूर्ण हैंडओवर प्रक्रिया गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त, GDA की तकनीकी एवं प्रशासनिक टीम तथा नगर निगम की टीम की उपस्थिति में आपसी सहमति से हस्ताक्षर कर विधिवत रूप से पूरी की गई। प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं अभिलेखीय स्वरूप में सुनिश्चित किया गया।
हस्तांतरण के दौरान संबंधित परिसंपत्तियों से जुड़े सभी तकनीकी अभिलेख, ड्रॉइंग्स, संचालन एवं अनुरक्षण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नगर निगम को सौंपे गए, जिससे भविष्य में नागरिक सुविधाओं का संचालन, रख-रखाव एवं विकास कार्य बिना किसी बाधा के किया जा सके।
₹66.32 करोड़ की वित्तीय सहायता का प्रावधान
इन योजनाओं के सुदृढ़ीकरण, अनुरक्षण और प्रभावी संचालन के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा नगर निगम को कुल ₹66 करोड़ 32 लाख की धनराशि उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसके अंतर्गत फरवरी माह में ₹33.16 करोड़ तथा मार्च माह में शेष ₹33.16 करोड़ की धनराशि नगर निगम को प्रदान की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस वित्तीय सहयोग से संबंधित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, सड़क अनुरक्षण, सीवरेज एवं जल निकासी प्रबंधन, हरित विकास, यातायात व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को और अधिक मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से 56 एम.एल.डी. एसटीपी के प्रभावी संचालन से सीवरेज निस्तारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और जल प्रदूषण नियंत्रण में सहायता मिलेगी।
स्थायी और नागरिक-हितैषी शहरी प्रबंधन पर जोर
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल नई योजनाओं का विकास करना नहीं है, बल्कि विकसित परिसंपत्तियों को सक्षम निकायों को सौंपते हुए स्थायी, उत्तरदायी एवं नागरिक-हितैषी शहरी प्रबंधन सुनिश्चित करना भी है। प्राधिकरण भविष्य में भी योजनाबद्ध और समन्वित प्रयासों के माध्यम से शहर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।







