
यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक से बिना बड़ी सर्जरी किए दूर की जानलेवा रुकावट
यूपी – गाजियाबाद, 2 नवंबर। कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक का इस्तेमाल कर 73 वर्षीय मरीज की पित्त नली में फंसी पथरी निकालने में सफलता हासिल की है। मरीज की पहले पेट की सर्जरी हो चुकी थी, जिसके कारण सामान्य एंडोस्कोपिक तरीके से पित्त नली तक पहुंचना संभव नहीं था। संक्रमण के कारण मरीज की किडनी भी प्रभावित होने लगी थी और निमोनिया ने उसकी हालत गंभीर कर दी थी। डॉक्टरों ने स्पाईग्लास डीएस मिनिएचर कैमरे की मदद से जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
गाजियाबाद के वैशाली निवासी मरीज की जांच में पित्त नली में दो पथरियां होने का पता चला। पित्त नली लीवर से आंत तक पित्त पहुंचाने का काम करती है। इसमें रुकावट के कारण संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगा था। डॉक्टरों ने पहले लक्षित एंटीबायोटिक दवाएं शुरू कीं और संक्रमित पित्त को बाहर निकालने के लिए त्वचा तथा लीवर के रास्ते एक पतली नली डाली।
इसके चार दिन बाद यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं एंडोस्कोपी विभाग के निदेशक डॉ. कुणाल दास और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक हंस ने स्पाईग्लास डीएस मिनिएचर कैमरे की सहायता से इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी प्रक्रिया की। इस तकनीक में नियंत्रित ऊर्जा तरंगों के माध्यम से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। डॉक्टरों ने पथरी और रुकावट पैदा करने वाली गाद को निकालकर पित्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए स्टेंट भी लगाया।
आमतौर पर इस तरह का रास्ता तैयार होने के बाद अगली प्रक्रिया के लिए एक से दो सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने चार दिन में ही इलाज करने का निर्णय लिया। प्रक्रिया के दौरान कोई जटिलता नहीं आई और मरीज को स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। करीब छह सप्ताह बाद हुई जांच में मरीज की हालत अच्छी मिली। उसका लीवर सामान्य रूप से काम कर रहा था और पीलिया के लक्षण भी नहीं थे।
डॉ. कुणाल दास ने बताया कि मरीज की पिछली सर्जरी के कारण सामान्य एंडोस्कोपिक रास्ते से पित्त नली तक पहुंचना संभव नहीं था। संक्रमण और किडनी को हो रहे नुकसान के कारण समय पर उपचार जरूरी था। सीधे कैमरे से पित्त नली को देखकर वैकल्पिक रास्ते से पथरी की पहचान कर उसे निकालना संभव हुआ।
डॉ. दीपक हंस ने बताया कि लीवर के रास्ते बनाए गए नए चैनल को सामान्यतः अगली प्रक्रिया से पहले तैयार होने के लिए समय दिया जाता है, लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जल्द उपचार का निर्णय लिया गया। आधुनिक तकनीक की मदद से बिना बड़ी सर्जरी के पित्त नली की रुकावट दूर करने में सफलता मिली।
डॉक्टरों के अनुसार यह उपचार उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, जिनकी पिछली सर्जरी के कारण सामान्य तरीके से इलाज करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि ऐसी प्रक्रिया में मरीज की स्थिति और संभावित जोखिमों का आकलन करना बेहद जरूरी होता है।

