
यूपी – गाजियाबाद। सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर यादव ने कहा कि 18 जुलाई को शांतिपूर्ण धरना दे रहे सोनम वांगचुक और उनके साथियों को धरना स्थल से जबरन हटाया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई की देश-विदेश में आलोचना हो रही है और इससे लोकतंत्र की छवि प्रभावित होती है।

सिकंदर यादव ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। उनका कहना है कि अहिंसक आंदोलन देश की लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा रहे हैं और सरकार को ऐसे आंदोलनों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो सरकार को बल प्रयोग के बजाय उनसे संवाद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए वार्ता के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उनका मानना है कि देश के युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल आवश्यक है।

