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गाजियाबाद के भी होटल, स्कूल और कॉलेज सुरक्षित नहीं!

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दस वर्षों के अग्निकांड, प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल

यूपी – गाजियाबाद। तेजी से विकसित होते शहरों में सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का प्रमुख शहर गाजियाबाद भी इससे अछूता नहीं है। पिछले एक दशक में यहां बहुमंजिला इमारतों, होटलों, मॉलों, स्कूलों और कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। विकास की इस रफ्तार ने जहां नई सुविधाएं दी हैं, वहीं अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।

हाल के वर्षों में हुई आग की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या गाजियाबाद के होटल, स्कूल और कॉलेज वास्तव में सुरक्षित हैं? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है? और यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उससे निपटने की तैयारी कितनी है?

बढ़ती आग की घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता

गाजियाबाद में अग्निकांडों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फायर विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही लगभग 580 अग्निकांड दर्ज किए गए। जनवरी में 79, फरवरी में 97, मार्च में 128 और अप्रैल में 286 घटनाएं सामने आईं।

विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत मामलों का कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट रहा। बढ़ती गर्मी, ओवरलोड बिजली व्यवस्था, जर्जर वायरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इन घटनाओं को और बढ़ा रही है।

अग्निशमन विभाग का मानना है कि अधिकांश हादसे रोके जा सकते हैं, यदि भवन मालिक नियमित रूप से विद्युत व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की जांच कराएं।

होटलों की सुरक्षा पर सबसे अधिक सवाल

गाजियाबाद के होटल क्षेत्र को सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। यहां छोटे-बड़े सैकड़ों होटल संचालित हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोग ठहरते हैं।

जांच के दौरान कई होटलों में:

फायर एनओसी की कमी

आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध

अग्निशमन उपकरण निष्क्रिय

जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं।

होटलों में रसोईघर, गैस कनेक्शन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगातार चलते रहते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। संकरी सीढ़ियां और बंद निकास मार्ग किसी भी दुर्घटना को भयावह बना सकते हैं।

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

स्कूलों में सुरक्षा का प्रश्न सबसे संवेदनशील है क्योंकि यहां प्रतिदिन हजारों बच्चे आते हैं।

हाल के निरीक्षणों में भवन संरचना, विद्युत व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की जांच की गई। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है।

आवश्यक है कि:

नियमित मॉक ड्रिल

आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण

छात्रों और शिक्षकों की जागरूकता

कई स्कूलों में यह व्यवस्था मौजूद है, लेकिन पुराने संस्थानों में अभी भी सुधार की जरूरत है।

कॉलेजों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है क्योंकि यहां नियामक मानकों का पालन अधिक होता है।

अधिकांश बड़े संस्थानों में:

फायर अलार्म सिस्टम

आपातकालीन निकास

सुरक्षा कर्मी

अग्निशमन उपकरण

उपलब्ध हैं, लेकिन उनका नियमित रखरखाव और प्रशिक्षण अब भी चुनौती बना हुआ है।

पिछले दस वर्षों की प्रमुख घटनाएं

पिछले दशक में कई बड़े हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं:

खोड़ा क्षेत्र की बहुमंजिला इमारत में भीषण आग

इंदिरापुरम हाईराइज सोसायटी में बड़ा अग्निकांड

वैशाली के मॉल परिसर में आग

साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री दुर्घटनाएं

इन घटनाओं ने स्पष्ट किया कि आधुनिक भवन भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

क्या कहते हैं दमकल अधिकारी

मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अनुसार अधिकांश आग की घटनाएं मानवीय लापरवाही और शॉर्ट सर्किट के कारण होती हैं।

उनका कहना है कि कई भवनों में:

फायर उपकरण वर्षों से बिना जांच के पड़े रहते हैं

एनओसी का नवीनीकरण समय पर नहीं होता

पूर्व अधिकारियों ने भी बार-बार चेताया है कि सुरक्षा केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का विषय है।

आग लगने के प्रमुख कारण

विद्युत शॉर्ट सर्किट

पुरानी वायरिंग

अवरुद्ध निकास मार्ग

उपकरणों का अनुपयोग

नियमित निरीक्षण का अभाव

मॉक ड्रिल की कमी

प्रशासन की कार्रवाई

प्रशासन द्वारा समय-समय पर:

फायर ऑडिट अभियान

स्कूलों और होटलों की जांच

नोटिस और कार्रवाई

मॉक ड्रिल अभियान

चलाए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पर्याप्त नहीं है।

आगे क्या किया जाना चाहिए

विशेषज्ञों का मानना है कि:

सभी भवनों का वार्षिक फायर ऑडिट अनिवार्य हो

स्कूलों में नियमित मॉक ड्रिल हो

पुरानी इमारतों की संरचनात्मक जांच हो

नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो

नागरिकों में जागरूकता बढ़ाई जाए

निष्कर्ष

गाजियाबाद के होटल, स्कूल और कॉलेज पूरी तरह असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं कहा जा सकता।

सबसे बड़ी चुनौती होटल क्षेत्र में दिखाई देती है, जबकि स्कूलों और कॉलेजों में प्रशिक्षण और जागरूकता को और मजबूत करने की जरूरत है।

बढ़ती आग की घटनाएं यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि सुरक्षा को केवल सरकारी जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। प्रशासन, संस्थानों और नागरिकों—तीनों को मिलकर सुरक्षा संस्कृति विकसित करनी होगी, क्योंकि सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

फैक्ट बॉक्स: गाजियाबाद की सुरक्षा तस्वीर

अध्ययन अवधि: 2016–2026

2026 के पहले चार महीनों में अग्निकांड: ~580

प्रमुख कारण: 90% शॉर्ट सर्किट

चिन्हित असुरक्षित भवन: 42

फायर ऑडिट में शामिल स्कूल: ~400

सबसे संवेदनशील क्षेत्र: होटल, हाईराइज भवन, भीड़भाड़ वाले परिसर

प्रमुख संदेश:
 “सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, आवश्यकता है।”

लेखक:
डॉ. चेतन आनंद
(कवि एवं पत्रकार)