
यूपी – गाजियाबाद। सामाजिक समरसता, समानता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ, गोरखपुर की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को हिंदी भवन, गजप्रस्थ में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के संतों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
मानवमंदिर मिशन के अरुण योगी ने कहा कि समरसता केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को जोड़ती है। जीवन दीप आश्रम के स्वामी पद्मानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना समरसता में निहित है, जहां ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ सर्वोपरि है।
विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश खांडेकर ने गोरक्षपीठ की भूमिका को समाज के अंतिम व्यक्ति तक समरसता का संदेश पहुंचाने वाला बताया। वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि समरसता राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और इसे बढ़ावा देना समाज व मीडिया की जिम्मेदारी है।
ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशिप्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों का आभार जताया। यह संगोष्ठी राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रेरणा से चल रही श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं।







