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शास्त्रीय प्रमाणों के अनुसार 9 जून को गंगा दशहरा व निर्जला एकादशी 11 जून को

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आचार्य शिव कुमार शर्मा – ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है ।शास्त्रों में वर्णित है कि इसी दिन गंगा जी पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।

दशहरे का अर्थ है 10 दोषों को हरने वाला। जेष्ठ मास में गंगा दशहरे को गंगा में किया गया स्नान सभी पापों को हरने वाला होता है। इस दिन गंगा स्नान करने के लिए पूरे वर्ष भर के गंगा स्नान का फल मिल जाता है।

गंगाजल का पान करने से शरीर के सभी अशुद्धियां समाप्त जाती हैं और व्यक्ति  स्वस्थ और निरोग हो जाता है। इसलिए इस दिन  थोड़ा गंगा जल का पान अवश्य करें। थोड़ा सा गंगाजल अन्य जल मिलाने से उसके गुण सारे जल में आ जाते हैं, इसलिए उस जल को पीने का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने का परम महत्व है।

इस वर्ष  9 जून को श्री गंगा दशहरा का उत्सव मनाया जाएगा। यद्यपि उस दिन प्रातः 8:21 तक नवमी तिथि है उसके पश्चात दशमी आएगी धर्मसिंधु में कहा गया है कि दशहरा ज्येष्ठ सुदी पूर्वान्हव्यापिनी दस योग से युक्त दसमी में मनाया जाता है।
शास्त्रीय प्रमाण इस प्रकार है।
*इयं दशहरा संज्ञिका*
*अत्र दशयोगयुक्ता:ज्येष्ठमासिसिते पक्षे दशम्यां बुधहस्तयो:गरानन्दे कन्याचन्द्रेवृषेरवौ।*
उपरोक्त प्रमाण वाक्य के अनुसार ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गर करण, कन्या राशि में चंद्रमा और वृषभ राशि में सूर्य।
उपरोक्त 10 योगों में से 8 योग उस दिन मिल रहे हैं। इन योगों के आधार पर गंगा दशहरा 9 जून का ही शास्त्रोंक्त  है।
श्री गंगा दशहरा में गंगा तट पर गंगोत्री, हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, काशी, त्रिवेणी आदि पवित्र घाटों पर स्नान करने का फल बहुत ही श्रेष्ठ बताया गया है।

*निर्जला एकादशी विचार*

इसी प्रकार शास्त्रों के नियम के अनुसार निर्जला एकादशी 11 जून को शास्त्र सम्मत है। यद्यपि 11 जून को एकादशी मात्र 45 पल है। अर्थात प्रातः 5:45 पर द्वादशी आ जाएगी। इसलिए  एकादशी त्रि स्पर्शा एकादशी मानी जाएगी। जो वैष्णव के लिए बहुत ही उत्तम है। यद्यपि प्रातः काल सूर्योदय के समय एकादशी, इसके पश्चात द्वादशी और रात्रि 3:23 के बाद त्रयोदशी आ जाएगी। इसीलिए द्वादशी विद्धा एकादशी व्रत करने का विधान है।

गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी में जलीय वस्तुओं का दान करना बहुत ही उत्तम माना गया है। जल, मीठा शरबत, घड़ा जग, बाल्टी पंखा आदि का दान योग्य पात्र को करना बहुत उत्तम रहता है।