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पुतला जलाकर पुरबिया समाज ने सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेशों की अवमानना की : डॉ बी पी त्यागी

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यूपी – गाजियाबाद छठ पूजा के दौरान जनप्रतिनिधि द्वारा हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करने पर डॉक्टर बीपी त्यागी द्वारा दिए बयान के विरोध में पुरबिया जन कल्याण परिषद द्वारा डॉक्टर बीपी त्यागी का पुतला फूकने बालों पर डॉक्टर बीपी त्यागी ने कानूनी कार्रवाई करने की कि मांग।

डॉक्टर बी पी त्यागी ने कहा मैने जो अपने लेख में हेलीकॉप्टर पुष्प वर्षा को लेकर जो बात बोली है उसमें मैने किसी भी तरह से ना तो किसी भी समाज के वर्ग धर्म या देवी देवताओं के बारे मे बोला है ना ही किसी भी प्रकार से किसी भी धर्म की आस्था और विश्वास पर टिप्पणी की है। मैं सिर्फ इस लिये अपनी बात रख रहा हूँ क्योंकि मेरी बात को सिर्फ गलत ढंग से पेश किया जा रहा है बल्कि कुछ लोग अपने निजी और राजनैतिक स्वार्थ के चलते समाज को बरगला रहे हैं और मुझे समाजिक रूप से गलत बोल कर अपना राजनैतिक तुसष्टीकरण कर रहे हैं और मे उन लोगों को ये बताना चाहता हूँ की समाज में सब को अपनी बात कहने और सही को सही और गलत को गलत बोलने का हक़ धर्म और संविधान दोनों ने ही दिया है। मेरा कहना आज भी प्रासंगिक है की पुष्प वर्षा धार्मिक रूप से देवता प्रसन्न हो कर किया करते थे और आज राजनेता अपनी ज़िमेदारी भूल कर प्रजा के द्वारा दिये गई कर का दुरूपयोग करके और उस पैसे से जो सहूलियतें समाज को दी जा सकती थीं या सामाजिक उत्थान पर प्रयोग हो सकती थीं उनका सिर्फ ऐसा प्रयोग करके ये समाज को धोखा देना ही तो है, जोकि आँख मे धुल झोखना ही है और मे ये बात सोच समझ कर बोल रहा हूँ जिस किसी को मेरी बात से ऐतराज है वो अपना पक्ष रख सकता है मे उसको जवाब देने के लिये तैयार हूँ। पर जिस तरह से कुछ लोग सिर्फ राजनीति कर रहे हैं वो आपराधिक और गैर सामाजिक हैं उनका बहिष्कार होना चाइये और कानून को उनके खिलाफ सामाजिक उन्माद और दुष्प्रेशन की धाराओं में कार्यवाही करनी चाहिये। पुरबिया समाज ने पुतला फुककर माननीय सुप्रीम कोर्ट व एन.जी.टी. के आदेश का अपमान किया है। में एक सनातनी हूँ और सभी प्रकार से समाज का हित चाहता हूँ और अपनी बात को तोड़मरोड़ कर और गलत ढंग से पेश किये जाने का विरोध करता हूँ बल्कि जिन लोगों ने मेरी बात को अपने निजी स्वार्थ के लिये ऐसा किया है उनके ऊपर क़ानूनी कार्यवाही किये जाने की समाज और सरकार से उम्मीद करता हूँ और ऐसा न होने पर स्वयं कानून की शरण लूंगा।