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दीपावली महोत्सव पूजन के विशिष्ट मुहूर्त व पूजन विधि

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धनतेरस /धन्वंतरि जयंती, छोटी दीपावली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज के शुभ मुहूर्त एवं महत्व

आचार्य शिव कुमार शर्मा – दीपावली महापर्व हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व है। इसकी पांच दिवसीय उत्सव श्रंखला बहुत ही प्रेरणादायक है।

धनतेरस के प्रमुख मुहूर्त

इस वर्ष 10 नवंबर 2023 को धनतेरस ,धन्वंतरी जयंती और प्रदोष व्रत का उत्सव मनाया जाएगा। 10 नवंबर को 12-35 बजे से त्रयोदशी तिथि आ जाएगी। मध्यान्ह 13-14 बजे से 14:42 बजे तक आयुर्वेद के जन्मदाता धनवंतरी जी के पूजन और हवन के के लिए उत्तम मुहुर्त है। आयुर्वेद के मानने वाले अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरी पूजन और हवन का आयोजन करते हैं।

शाम को प्रदोष काल, गोधूलि वेला और स्थिर लग्न 17-43 बजे से 19-39 बजे तक धनतेरस का पूजन करना शुभ रहेगा।इस अवधि में बर्तन, ज्वेलरी , वस्त्र ,घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना बहुत ही श्रेष्ठ रहेगा।

छोटी दीपावली, नरक चतुर्दशी

छोटी दीपावली अर्थात रूप चौदस 11 नवंबर को मनाई जाएगी। यद्यपि 11 नवंबर को प्रातः 13-57 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। उसके पश्चात पूरे दिन चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था इसलिए इसे नरक चतुर्दशी कहते हैं। शाम को दीपदान करने का बहुत महत्व है। छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं।
इस दिन स्नान करने से पहले अपने शरीर पर उबटन अथवा तेल की मालिश करने का भी विधान है। यह व्यक्ति की सुंदरता बढ़ाता है, इसलिए इसको रूप चतुर्दशी भी कहते हैं।

ऐसा माना जाता है कि आयुर्वेद के नियमों के अनुसार शरीर पर उबटन लगाकर अथवा तेल की मालिश करके स्नान करने से आरोग्य की वृद्धि होती है और शरीर की चमक आ जाती हैं शरीर पर दिव्य कांति आ जाती है।
इस रात्रि हनुमान जी की पूजा भी की जाती है। हनुमान जी को चूरमा अथवा लड्डू का भोग लगाकर आरती की जाती है और उनको सिंदूरदान दिया जाता है।
शाम को स्थिर लग्न में ही हनुमान जी का पूजन करना व भोग लगाने का विधान है।

दीपावली महापर्व और दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त

12 नवंबर को कार्तिक अमावस्या को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। अंधकार को भी अपने छोटे से प्रकाश से चुनौती देते हुए दीपक हमें संघर्ष में स्थिर रहना सिखाते हैं। इसलिए यह दीपावली का नाम दिया गया है।

इस वर्ष दीपावली 12 नवंबर 2023 दिन रविवार को स्वाति नक्षत्र में मनाई जाएगी। गुरुवार को स्वाति नक्षत्र होने से लुंबक योग बनता है। और इस दिन यह योग पूरे दिन और रात रहेगा।
अधिकतर व्यापारी और जन सामान्य दीपावली पूजन और महालक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न को बहुत शुभ मानते हैं ।ऐसा कहते हैं कि ऐसे पुण्य महायोग में अथवा लग्न में दीपावली पूजन करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। और घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है।

व्यापारिक संस्थानों में दीपावली पूजन के दिन के शुभ मुहूर्त

1.व्यापारिक संस्थानों, कारखानों के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न बहुत ही श्रेष्ठ रहता है। यह प्रातः काल 9:20 से 11:24बजे तक रहेगा।

  1. मध्यान्ह 11:24 बजे से 13:06 बजे तक स्थिर लग्न में शुभ मुहूर्त है। इसमें अमृत का चौघड़िया भी बहुत श्रेष्ठ फलकारक है। 13:25 से 14: 45 बजे तक शुभ का चौघड़िया बहुत अच्छा मुहूर्त है। (इस दिन 4:30बजे से 18:00 बजे तक राहुकाल का समय त्यागने योग्य है) इस समय में आप व्यापारिक संस्थानों में लक्ष्मी गणेश का पूजन कर सकते हैं।

रात्रि के लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त

प्रदोष काल के बाद मध्य रात्रि तक गृहस्थी लोग अपने अपने घरों में महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी गणेश जी का पूजन करते हैं। अथवा किसी विद्वान से कराते हैं। इसके लिए श्रेष्ठ मुहूर्त इस प्रकार है:
शाम 17:35 बजे से 19:31 बजे तक वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) और सुबह की चौघड़िया व प्रदोष काल महालक्ष्मी पूजन के लिए बहुत ही श्रेष्ठ है ।
इसके पश्चात 19:31बजे 21:45 बजे तक मिथुन लग्न आएंगे, यह भी दीपावली पूजन के लिए उत्तम है। और कर्क लग्न रात्रि 21:,45 बजे से 24: 04 बजे तक शुभ रहेंगे।
रात्रि 24: 04 बजे से सिंह लग्न आएंगे। इसे निशीथ काल कहते हैं।
इस मुहूर्त में तांत्रिक लोग अपनी सिद्धि करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को कोई मंत्र सिद्ध करना हो या इष्ट की पूजा करनी हो तो इसमें आप पूजा करने से तुरंत फल मिलता है।

लक्ष्मी गणेश पूजन की विधि

सर्वप्रथम दीपावली पूजन के शुभ समय को ध्यान रखते हुए दीपावली पूजन की सभी सामग्री तैयार कर ले। रोली, चावल, कलावा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे, मिष्ठान, इत्र, फल, पुष्प माला, गुलाब और कमल के फूल, सेव, अनार आदि फल, इसके साथ साथ, लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति, श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, कमलगट्टे लक्ष्मी कौड़ी, श्रीफल एकाक्षी नारियल आदि लक्ष्मी वर्धक वस्तुएं भी लक्ष्मी गणेश जी के पूजन के समय रखें। श्री गणेश, इंद्र, वरुण, कुबेर, नवग्रह देवताओं के पूजन के पश्चात महालक्ष्मी का आवाहन करें और पूजा करें। अपने घर में अथवा दुकान में बहीखाता, कंप्यूटर आदि का भी पूजन करें। क्योंकि पूरे वर्ष भर इन्हीं पर व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियां होती हैं। एक थाली में 11 या 21 मिट्टी के दीए जलाएं और दीप मालिका पूजा करके उन्हें द्वार, छत और घर के अन्य स्थानों पर रख दें। बाद में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की आरती कर खीर बताशे, मिष्ठान आदि का भोग लगाएं व प्रसाद वितरण करें।
दीपावली पूजन के बाद महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
ॐ श्रीं श्रियै नमः। लक्ष्मी जी के इस मन्त्र का कमल गट्ठे की माला से इच्छा के अनुसार जाप करें। अथवा श्रीसूक्तम् का पाठ करें।
धनतेरस को लाए हुए मिट्टी के लक्ष्मी गणेश का पूजन करें और अगले दिन पुराने लक्ष्मी गणेश मंदिर से हटा कर उनका विसर्जन कर दें और नए लक्ष्मी गणेश मंदिर में स्थापित करें।

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

14 नवंबर को गोवर्धन की पूजा होगी। गोवर्धन के यहां कई अर्थ है। सबसे पहले गोवर्धन पर्वत जिसे भगवान कृष्ण ने ब्रज वासियों की रक्षा करने के लिए अपने उंगली पर उठाकर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था। गोवर्धन अर्थात गौधन का पालन, पोषण, संरक्षण और संवर्धन करना।

भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए ग्रामीण अंचलों में गोवर्धन के दिन शाम के समय गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है उसमें गोबर से चरागाह, घास, छोटे-छोटे पशु आदि बना करके उनका पूजन किया जाता है और अपने पशुओं के गले में सुंदर से घंटी अथवा पट्टा बांध देते हैं।
गोवर्धन पूजन के लिए भी शाम को वृषभ लग्न उत्तम रहेगा।
इस दिन मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद तैयार किया जाता है और 56 व्यंजनों का भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाया जाता है।

भैया दूज, भैया का मंगल टीका करने का मुहूर्त

15 अक्टूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। बहन अपने भाइयों के लंबी आयु व उत्तम स्वास्थ्य के लिए भाइयों को तिलक करती हैं और उपहार देती हैं। भाई भी उन्हें सम्मान पूर्वक उपहार देते हैं‌।

भैया को तिलक करने का शुभ मुहूर्त

प्रातः 6:51 बजे से 9: 09 बजे तक के वृश्चिक लग्न (स्थिर लग्न) श्रेष्ठ है। इसके पश्चात 9:00 बजे से 10:30 बजे तक शुभ है
मकर लग्न 11:13 बजे से 12:00 बजे तक तिलक का शुभ मुहूर्त है। 12:00 बजे से 1:30 बजे तक राहु काल को त्यागना चाहिए।
कुंभ लग्न अर्थात मध्यान्ह 1:30 बजे के बाद बजे से 14:23 बजे तक भाइयों को मंगल तिलक करना बहुत शुभ है।
शाम को 17:24 बजे से 19:20 बजे तक भी बहने भैया का तिलक कर सकती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विश्वकर्मा, चित्रगुप्त पूजा भी की जाती है।
व्यापारिक संस्थानों में फैक्ट्रियों में व्यापारी, उद्योगपति इस दिन भगवान विश्वकर्मा एवं चित्रगुप्त की विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। इस तिथि को यम द्वितीया भी मनाई जाती है। अपने भाई के रक्षा के लिए यम के नाम का एक दीपक जलाया जाता है।
इस प्रकार पंच दिवसीय यह दीपावली महापर्व संपन्न होता है जो हमारे समाज की चारों वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी का प्रतिनिधित्व करता है।

आचार्य शिव कुमार शर्मा,
आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)