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हिंदी को बढ़ावा देने की शुरुआत अपने आप से ही होनी चाहिए : न्यायाधीश गौतम चौधरी

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मौसी को सम्मान देने के लिए मां का अपमान नहीं किया जा सकता

हिंदी में कार्य करने वाले न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी एवं रचनाकार सम्मानित

यूपी – गाजियाबाद हिंदी में 13 हज़ार से अधिक निर्णय लिख चुके इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गौतम चौधरी का कहना है कि हिंदी को बढ़ावा देने की शुरुआत अपने आप से ही होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सभी लोग अपने हस्ताक्षर हिंदी में करना शुरू कर दें।


अखिल भारतीय हिंदी विधि प्रतिष्ठान की गाजियाबाद इकाई द्वारा जिला कोर्ट परिसर में आयोजित सम्मान समारोह एवं काव्य संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे न्यायमूर्ति गौतम चौधरी 13 हज़ार से ज्यादा निर्णय हिंदी में सुना चुके हैं। उनका कहना है कि अंग्रेजी या किसी भी अन्य भाषा को लेकर उनके मन में कोई कटुता नहीं है। वो स्वयं भी कॉन्वेंट में पढ़े हुए हैं। हिंदी उनकी मां है तो अन्य भाषा मौसी की तरह हैं लेकिन वो मौसी के सम्मान के लिए मां का अपमान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि लोग हिंदी के प्रचार प्रसार और बढ़ावा देने के लिए बड़ी बड़ी बात करते हैं लेकिन अपने हस्ताक्षर इंग्लिश में ही करते हैं। इसे बदले जाने की जरूरत है। सभी लोगों को हिंदी में हस्ताक्षर करके हिंदी को बढ़ावा देने की शुरुआत करनी चाहिए।


न्यायाधीश गौतम चौधरी ने कहा कि अक्सर इस तरह की बातें कही जाती है कि कई शब्द हिंदी में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस वाद विवाद में पड़ना ही नहीं चाहिए। सब भाषाएँ अन्य भाषाओं के शब्दों को ग्रहण करती हैं। अगर रेलवे स्टेशन की हिंदी नहीं है तो डकैती की भी इंग्लिश नहीं है। उन्होंने इस तरह के कई शब्द बताए जो की इंग्लिश में हिंदी से लिए गए हैं।


मुख्य वक्ता के रूप में पधारे एडिशनल सॉलीसिटर ऑफ इंडिया चेतन शर्मा ने कहा कि हिंदी में काम करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है। सिर्फ भाषण या बयान देने से ये काम नहीं हो सकता। विशेष अतिथि चीफ सिविल वार्डन ललित जायसवाल ने बताया कि यूनिसेफ की 13 साल पहले की रिपोर्ट में हिंदी को दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा बताया गया था। अमेरिका के 73 विश्वविद्यालयों समेत दुनिया के 7 हज़ार से ज्यादा विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है।


इस मौके पर न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने हिंदी को बढ़ावा देने के क्षेत्र में कार्य कर रहे कई न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में सबसे पहले हिंदी में फैसला सुनाने वाले प्रेमचंद गुप्ता जी के नाम से दिए जाने वाले हिंदी सम्मान इस बार रचनाकार राज कौशिक, अंजू जैन और डॉ विवेक गौतम को दिए गए। तीनों रचनाकारों ने काव्य पाठ भी किया। इनके अलावा न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त हिंदी साहित्य सम्मान से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हीरालाल तथा सिविल जज श्रीमती मनीषा साहू को और अधिवक्ताओं में रजत छावड़ा, प्रिंस कुमार, अरुण कुमार डागर एवं देवेंद्र सिंह को सम्मानित किया गया। आचार्य संजीव अग्निहोत्री और गुजरात एवं अरुणाचल सरकार के सर्वोच्च न्यायालय में स्थाई अधिवक्ता विभांशु शेखर उपाध्याय का भी अभिनंदन किया गया।


बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठान के महासचिव दर्शनानंद गौड़ ने किया। प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष धनेश प्रकाश गर्ग, बार के सचिव स्नेह त्यागी, पूर्व अध्यक्ष विजयपाल राठी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आलोक पांडे ने की।