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गुरुद्वारा साहिब माथा टेकने आए स्कूली बच्चों को सिख धर्म की दी जानकारी

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यूपी – गाजियाबाद 5 अगस्त को जिंदल पब्लिक स्कूल के बच्चे गुरुद्वारा साहिब सी ब्लॉक कवि नगर में माथा टेकने आए। बच्चों को गाजियाबाद सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह ने गुरुद्वारा साहिब सिख धर्म के बारे में जानकारी देते हुए बताया सिख का अर्थ है शिष्य सीखने वाला गुरद्वारा साहिब का अर्थ है गुरु का घर।

सरदार मंजीत सिंह ने बच्चों को बताया श्री गुरु नानक देव जी का जन्म तलवंडी आज जिसका नाम है ननकाना साहिब और वह पाकिस्तान में है गुरु नानक देव जी का जब जन्म हुआ तो सबसे पहले जो आकाश से बिजली चमकी राय बुलार और दौलत दाई को अलार्म हुआ परमात्मा ने धरती पर कोई पीर कोई पैगंबर भेजा है, राय बुलार रात को 12:00 बजे लालटेन लेकर पूरे गांव में तलाश करता रहा कि किसके घर बालक हुआ है कालू मेहता के यहां बालक का जन्म हुआ। गुरु नानक देव जी कोई साधारण बालक नहीं थे गुरु नानक देव जी परमात्मा के द्वारा भेजे गए पीर पैगंबर थे। गुरु नानक देव जी परमात्मा के स्वरूप थे गुरु नानक देव जी ने अपनी जिंदगी में 35000 किलोमीटर पैदल यात्रा करके लोगों के बीच संदेश दिया उस परमात्मा ने हमें इंसान बना कर धरती पर भेजा है उस परमात्मा की नजरों में सभी इंसान बराबर है कोई छोटा बड़ा नहीं कोई हिंदू मुसलमान भी नहीं हमने धर्मों में बांटा है। गुरु नानक देव जी ने परमात्मा के संदेश को लेकर समाज में फैले हुए कर्मकांड को लेकर बराबरी का संदेश लेकर पूरे हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया का भ्रमण किया और लोगों के बीच में जो अज्ञानता फैली थी उसको दूर करने का कार्य किया। गुरु नानक देव जी ने बाल अवस्था में ₹20 से लंगर की प्रथा को शुरू किया आज पूरे हिंदुस्तानी नहीं पूरी दुनिया में लंगर की सेवा चल रही है गुरुद्वारा साहिब के निशान साहब को देखकर भूखा इंसान भी बोल उठता है कि में भूख से नहीं मारूंगा।

उन्होंने बच्चों को समझाया इंसान को बांटना चाहिए, जरूरी नहीं हम बहुत बड़ी वस्तु ही बातें छोटी-छोटी भी वस्तु हम बांट सकते हैं जिससे हमें सेवा की प्रेरणा मिलती है। जो इंसान सेवा के क्षेत्र में कार्य करता है वह हमेशा सब्र में जिंदगी जीता है। सिख धर्म सेवा से बराबरी से संपन्नता पूर्ण है लोगों की मदद करना हर मुश्किल समय पर लोगों के बीच में रहकर मदद करना सिख धर्म सिखाता है। आए हुए सभी बच्चों को प्रसाद और टॉफी बांटकर बच्चों को बांटने की प्रथा पर चलने का आग्रह किया और समय-समय पर हर स्कूल के बच्चों को निमंत्रण दिया कि वह गुरुद्वारा साहिब आएं। इस अवसर पर सरदार जगमीत सिंह सज्जन सिंह व अन्य गुरुद्वारे में उपस्थित संगत ने भी संबोधित का जानकारी प्रदान की।