विश्व अस्थमा दिवस पर आईएमए द्वारा गोष्ठी का आयोजन

यूपी – गाजियाबाद विश्व अस्थमा रोग दिवस के उपलक्ष में लोगों को जागरूक करने के लिए आईएमए गाजियाबाद द्वारा गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें अस्थमा बीमारी के कारण और लक्षण की जानकारी के साथ-साथ बचाव के तरीके भी चिकित्सकों ने समझाएं। आईएमए गाजियाबाद के अध्यक्ष डॉक्टर आरके गर्ग ने बताया कि विश्व अस्थमा दिवस पर गायत्री अस्पताल लोहिया नगर में अस्थमा के मरीजों के लिए शिविर का आयोजन किया जाएगा जिसमें मरीजों को फ्री सुझाव दिए जाएंगे तथा इस दौरान कराई जाने वाली जांचों में भी छूट प्रदान की जाएगी।
आईएमए भवन में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए आईएमए के अध्यक्ष एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आरके गर्ग ने बताया कि दमा एक ऐसी बीमारी है जिसे श्वसन मार्ग के प्रदाह और श्वसन मार्ग के संकुचित हो जाने से पहचाना जाता हैं। उन्होंने कहा हम दमा को ठीक नहीं कर सकते किंतु ऐसी दवाएं हैं जो इसकी रोकथाम कर सकती हैं जिनसे रोगी इस बीमारी पर काबू पा सकते हैं। दमे के लक्षणों में शामिल हैं खांसी आना, सांस फूलना, व्यायाम करते समय सांस का फुलना, घरघराहट और हालांकि कभी कभार ही होता है कि व्यक्ति उन कार्यों को करने के बाद थकान महसूस करे जिन कार्यों को आप पहले बिना किसी समस्या के कर लिया करते थे। उन्होंने बताया कि अधिकतर दमा ग्रस्त लोगों को ऐसे लक्षण होते हैं जो दिन की अपेक्षा रात में काबू से बाहर अधिक होते हैं। डॉक्टर ने बताया कि दमे के बारे में एक तो यह ग़लत धारणा है कि दमा लगतार रहने की बजाय बीच – बीच में ठीक होने के बाद फिर से होता रहता है इस पर रोगियों को प्रायः समझाना पड़ता है। बहुत से रोगी मेरे पास आकर कहते हैं कि मुझे दमा तभी होता है जब मेरी सांस में घरघराहट होने लगती है नहीं तो मेरा दमा ठीक रहता है लेकिन यह बात सच नहीं है। उन्होंने बताया कि दमा एक न ठीक होने वाली बीमारी है इसलिए यह आपके पूरे जीवन काल तक रहता है। आप दमे को ठीक नहीं कर सकते, लेकिन बीमारी को कुछ समय के लिए शांत कर सकते हैं लेकिन बाद में यह फिर से होगी। डॉक्टर ने बताया कि दमे के बारे में एक और ग़लतफ़हमी है कि रोगियों को ऐसा लगता है कि वे अब व्यायाम या शारीरिक कामकाज नहीं कर पाएंगे, लेकिन सही उपचार हो तो दमा से ग्रस्त लोग स्वस्थ रह सकते हैं। डॉ गर्ग ने बताया कि इनहेलर प्रयोग के संबंध में दमा के रोगियों के लिए इनहेलर सबसे बढ़िया उपचार है। मौखिक उपचार से इनहेलर बेहतर इसलिए होते हैं क्योंकि इनसे दवा सीधे फेफड़ों में पहुंचती है और तेजी से असर की वजह से रोगियों को जल्द आराम मिलता है मौखिक उपचार की अपेक्षा दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं ।
इस दौरान चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष अग्रवाल ने विश्व अस्थमा दिवस पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अस्थमा कंट्रोल होता है किंतु खत्म नहीं होता इसलिए रोगी को बराबर दवाई लेते रहना चाहिए क्योंकि दो-तीन महीने में दवा से लोगों को आराम पड़ जाता है किंतु दवा छोड़ने से दोबारा अटैक होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने बताया कि भारत में अस्थमा के 3.8 करोड़ मरीज है जबकि उत्तर प्रदेश में लगभग 72 लाख मरीज है आंकड़े के अनुसार एक लाख पर 3 हजार मरीज उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद की बात करें तो गाजियाबाद की आबादी 22 से 23 लाख है जिसमें से 2.5 लाख लोग अस्थमा के मरीज हैं। कुल 7% लोग गाजियाबाद की आबादी के अस्थमा के मरीज हैं जबकि दिल्ली में 11% लोग सर्वे के अनुसार अस्थमा के मरीज पाए गए उनका कहना था कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण का है क्योंकि जिन शहरों में प्रदूषण की मात्रा अधिक है उन शहरों में दमा के मरीज अधिक पाए जाते हैं। डॉ आशीष अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण के साथ-साथ लोगों की जीवन शैली तथा खानपान और भावनात्मक होना भी अस्थमा रोग का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि आईएमए के द्वारा गायत्री अस्पताल में विश्व अस्थमा दिवस पर सुबह 8:30 बजे से 12:00 बजे तक फ्री चिकित्सा सलाह दी जाएगी तथा इस दौरान संबंधित जाँचो में मरीजों को छूट प्रदान की जाएगी।