स्व. गिरिराज सिंह की तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन

यूपी – गाजियाबाद सुप्रसिद्ध कवि स्व गिरीराज सिंह की तीन पुस्तकों का लोकार्पण रविवार को गोल्फ लिंक स्थित आशियाना ली रेजिडेंसी के क्लब में हुआ। इस अवसर पर हुए कवि सम्मेलन में कवियों और शायरों ने कई घंटे काव्यपाठ किया।
महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में स्व गिरिराज सिंह के तीन काव्य संग्रह “समय की कतरन”, “जलकुंभी” और “धागा तकली का” का विमोचन किया गया। गिरिराज सिंह के स्वर्गवास के बाद उनकी पुत्री शर्वरी सिंह व दामाद राजीव सिंह ने इन पुस्तकों को प्रकाशित करवाया है। विश्व प्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज़ समारोह के मुख्य अतिथि थे जबकि प्रसिद्ध शायर मंगल नसीम ने अध्यक्षता की। संचालन विख्यात कवि दिनेश रघुवंशी ने किया।
इस मौके पर हुए कवि सम्मेलन का श्रोताओं ने जमकर आनंद लिया। कवयित्री तूलिका सेठ ने सरस्वती वंदना की और गीत सुनाए। रूपा राजपूत की ये पंक्तियाँ पसंद की गई..
उद्देलित अंतस में सिंचित शब्दों का विस्तार है कविता
नेह- प्रेम गुम्फित हो जिसमें सरिता की वो धार है कविता
मन में कहीं आह जो उपजी हुई तरंगित लेखन में,
हिय में उमड़ी पीड़ा भेदे ऐसी इक तलवार है कविता
क्षेत्रीय भविष्य निधि, दिल्ली के आयुक्त प्रसिद्ध गजलकार आलोक यादव के ये शेर बहुत पसन्द किए गए –
जब तक कि इस सफ़र में मेरे हमक़दम थे तुम
ये इश्क़ मुझको आग का दरिया नहीं लगा
जिस दिन से तुम चले गए रिश्ते समेट कर
उस दिन से गाँव में कोई मेला नहीं लगा
जमशेदपुर से आईं कवयित्री सोनी सुगन्धा के ये अशआर सराहे गए –
कभी विश्वास के शीशे को चकनाचूर मत करना
किसी भी आदमी को तुम कभी मजबूर मत करना
गरीबी लाख आ जाये मुसीबत लाख छा जाए
कभी माँ बाप को नज़रों से अपनी दूर मत करना
शायर राज कौशिक को इन शेरों पर जमकर दाद मिली –
मैं बटवारा कराना चाहता हूं
तेरे हिस्से में आना चाहता हूं
तुम आने की खबर झूठी ही भेजो
मैं अपना घर सजाना चाहता हूं
फाउंडेशन के अध्यक्ष व महाकवि गोपाल दास नीरज के सुपुत्र आगरा से आए शशांक प्रभाकर का ये अंदाज़ लोगों के दिल में उतर गया –
भूली हुई चीज़ों को यादों में पास रखता हूँ
अपने किरदार में सब कुछ ही ख़ास रखता हूँ
इसलिए तो नहीं बनती मेरी समन्दर से
वो ग़रूर रखता है तो मैं भी प्यास रखता हूँ
फऱीदाबाद से पधारे सुप्रसिद्ध रचनाकार दिनेश रघुवंशी को इस गीत पर खूब वाहवाही मिली –
दिन तो ऐसे निकल गये, बचपन में गुल्लक से जैसे पैसे निकल गये।
विश्व प्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज़ को लोगों ने तालियां बजा बजा कर सुना –
ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई
जैसा नहीं हूँ वैसा दिखाने में कट गई
ये भी कोई मिलन है, लगे इस मिलन को आग
आधी से ज़यादा रात मनाने में कट गई
सुप्रसिद्ध गज़लकार मंगल नसीम को भी
लोगों ने खूब सुना –
पदम प्रतीक का काव्य पाठ भी पसन्द किया गया। विशेष अतिथि हिंदी अकादमी दिल्ली के उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। शर्वरी सिंह व राजीव सिंह ने सभी का स्वागत किया।