यूपी – गाजियाबाद गंगापुरम देवोत्थान एकादशी के शुभ अवसर पर माता तुलसी और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह संपन्नमें हनुमान मंगलमय परिवार के तत्वाधान में कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी के शुभ अवसर पर माता तुलसी और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर रीता शर्मा बबीता शर्मा सुषमा सिंह भागेश रोहिल्ला माया देवी उपस्थित रही।
विश्व ब्रह्मर्षि ब्राह्मण महासभा के संस्थापक/ राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मऋषि विभूति बीके शर्मा हनुमान ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इसे विष्णु प्रबोधिनी, देव-प्रबोधिनी, देवोत्थान, देव उथव, देव उठनी, प्रबोधिनी एवं कार्तिक शुक्ल एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह यानी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक शयन करने के बाद जागते हैं। यह कालावधि हमारी संस्कृति में चातुर्मास के नाम से प्रसिद्ध है। चातुर्मास के बाद भगवान श्रीहरि जब योगनिद्रा से जागते हैं, तब विश्व के संचालन का कार्यभार पुनः संभालते हैं। इसके साथ ही हिंदू संस्कृति में मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है, जबकि इससे पूर्व भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में मुंडन, जनेऊ एवं विवाहादि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते। इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर भगवान श्रीहरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्यों की शुरुआत ‘तुलसी विवाह’ के आयोजन के साथ ही हो जाती है। इस अवसर पर माता तुलसी और भगवान विष्णु के ‘शालिग्राम’ स्वरूप का विवाह संपन्न कराया जाता है।
