यूपी – गाजियाबाद भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारत विश्व का पहला देश है जहां कथा का जन्म हुआ। हमें गर्व है कि किस्सागोई की परंपरा हमसे ही पूरे विश्व में फैली है। हमारी वाचिक परंपरा ने ही वेद, पुराण, उपनिषद व अन्य ग्रंथों को संरक्षित करने का काम किया है। हमारी पौराणिक कथाएं लोकरंजन के अलावा हमें लोक संस्कृति व लोकाचार से जोड़ने का काम करती हैं। मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन के “कथा संवाद” में बतौर अध्यक्ष उन्होंने कहा कि किस्सागोई के आयोजन महाराष्ट्र में ही देखने को मिलते थे, लेकिन आज कथा संवाद जैसे आयोजन इसे समृद्ध करने का बड़ा काम कर रहे हैं।
होटल रेडबरी में आयोजित कथा संवाद में मुख्य अतिथि रेणु हुसैन ने कहा कि आज जब हम कहानी पर गहराते संकट पर चिंता जताते हैं तो हमें आश्वस्त होना चाहिए कि ऐसी कार्यशालाएं भी हैं जो
कहानी को संरक्षित करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि “कथा संवाद” जैसे आयोजन कथा-कहानी को संरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने “वह दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत थी”, अर्चना शर्मा ने “वो कहां था”, पुष्पा जोशी ने “उत्तराधिकारी”, रिंकल शर्मा ने “प्यारा सा ठग”, रश्मि वर्मा ने “फोर बैडरूम फ्लैट”, मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन के अध्यक्ष शिवराज सिंह ने कहानी “इकलौती” एवं सिनीवाली ने अपने उपन्यास अंश का पाठ किया। सभी रचनाओं की मुक्त कंठ से सराहना की गई। संयोजक सुभाष चंदर ने कहा कि नए रचनाकारों को ध्यान रखना चाहिए कि लेखन विन्यास की वह प्रक्रिया है जिसमें एक सलाई लेखक के तो दूसरी पाठक के हाथ में होती है। बंधन ढ़ीला होते ही पाठक कट जाता है। आयोजक आलोक यात्री ने कहा कि सोशल मीडिया साहित्य में बोनसाई संस्कृति को जन्म दे रहा है। “कथा संवाद” जैसी कार्यशाला के जरिए कहानी के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके सुखद परिणाम निरंतर सामने आ रहे हैं।
कहानियों पर विमर्श में विपिन जैन, डॉ. महकार सिंह, सुरेंद्र सिंघल, अनिल शर्मा, अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. बीना शर्मा, वागीश शर्मा, तेजवीर सिंह, मुकेश भटनागर, देवव्रत चौधरी ने सक्रिय हिस्सेदारी निभाई। कार्यक्रम का संचालन रिंकल शर्मा ने किया। इस मौके पर डॉ. पूनम सिंह एवं तेजवीर सिंह को “दीप स्मृति कथा सम्मान” व मनु लक्ष्मी मिश्रा को “किआन कथा सम्मान” प्रदान किया गया। “किआन कथा सम्मान” व अद्विक प्रकाशन के संस्थापक अशोक गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के दौर के कलमकारों के बीच पुस्तक प्रकाशन की स्पर्धा जिस तेजी से बढ़ रही है उसी रफ्तार से स्तरीय लेखन पीछे छूटता जा रहा है। गुणवत्ता और परिमाण का अंतर साहित्य की सेहत के लिए घातक है। इस अंतर को पाटने और साहित्य को स्थापित करने का काम “कथा संवाद” जैसे मंचों के माध्यम से ही संभव है। इस अवसर पर प्रो. अशोक सिन्हा के उपन्यास “एक रूह दो दिल” (अनुवाद), मधु अरोड़ा के कहानी संग्रह “तमाशा”, जवाहर चौधरी के काव्य संग्रह “गांधी जी की लाठी में कोंपलें” एवं डॉ. कायनात क़ाज़ी के यात्रा वृत्तांत “देवगढ़ के गोंड” का भी विमोचन किया गया। इन पुस्तकों का प्रकाशन अद्विक प्रकाशन द्वारा ही किया गया है।
इस अवसर पर डॉ. तारा गुप्ता, सुशील कुमार शर्मा, डॉ. प्रीति कौशिक, अनिमेष शर्मा, शकील अहमद सैफ, सत्यनारायण शर्मा, राष्ट्रवर्धन अरोड़ा, पराग कौशिक, आर. एल. शर्मा, शैलजा सिंह, अविनाश, प्रभात चौधरी, योगेश सिंह, अभिषेक कौशिक, सिमरन, कपिल कुमार, संगीता चौधरी, अजय कुमार, प्रभाकर नागपाल, साजिद खान सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन लेखक शेखर जोशी को श्रद्धांजलि से हुआ।







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भारत विश्व का पहला देश है जहां कथा का जन्म हुआ : संजय द्विवेदी
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