हरियाणा – गुरुग्राम, धर्म फॉर लाइफ एवं ट्यूलिप फाउंडेशन की ओर से गुरुग्राम में “धर्म फॉर लाइफ हिन्दी साहित्य” के शुभारंभ अवसर पर साहित्यिक परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का विषय “साहित्य : धर्म का मर्म, चेतना और परिवर्तन” रहा, जिसमें साहित्य, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर विचार-विमर्श हुआ।
वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवीयता, करुणा और नैतिक चेतना में निहित है तथा साहित्य इन्हीं मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम है। लेखक नरेंद्र नागदेव ने साहित्य को समाज का दस्तावेज बताते हुए इसे संघर्ष और आशाओं की अभिव्यक्ति कहा। लेखिका वंदना यादव ने स्त्री चेतना और साहित्य के संबंधों पर विचार रखे, जबकि पॉडकास्टर एवं लेखिका पारुल सिंह ने भारतीय साहित्य को लोकमंगल की परंपरा से जुड़ा बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मेधावी जैन ने किया। आयोजन में किरण यादव, रीता जैन, विशाल पाण्डेय, देवेन्द्र बहल और अशोक गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।








