
यूपी – गाजियाबाद। जनगणना 2027 के सफल संचालन को लेकर नियुक्त प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक राष्ट्रव्यापी और अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जिसकी सफलता सभी कार्मिकों के सक्रिय सहयोग पर निर्भर करती है।
निर्देशों के अनुसार, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत इस कार्य में नियुक्त प्रत्येक कर्मचारी को कार्य अवधि के दौरान लोक सेवक का दर्जा प्राप्त होगा। अधिनियम की धारा 5 और 11 के अंतर्गत सभी संबंधित कार्मिकों के लिए जनगणना कार्य में सहयोग करना विधिक रूप से अनिवार्य है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जनगणना कार्य में लापरवाही, इंकार या बाधा उत्पन्न करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ ₹1000 तक का जुर्माना और तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे इस राष्ट्रीय दायित्व को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण निष्ठा, शुद्धता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, ताकि जनगणना प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।







