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भारत में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग, अभिभावकों का राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को ज्ञापन

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यूपी – गाजियाबाद। शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और बढ़ते निजीकरण के विरोध में अभिभावक सामाजिक कल्याण समिति के नेतृत्व में अभिभावकों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी गाजियाबाद के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने और आम अभिभावकों को राहत दिलाने की मांग की गई।

अभिभावकों का आरोप है कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, जबकि निजी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय मनमानी फीस वसूलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। महंगाई के इस दौर में पहले से ही परेशान जनता पर महंगी शिक्षा अतिरिक्त बोझ बन गई है। उनका कहना है कि कई निजी शिक्षण संस्थान प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने के कारण उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अभिभावक लंबे समय से धरना-प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अभिभावकों ने पड़ोसी देश नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शिक्षा सुधार के लिए कड़े निर्णय लिए गए हैं, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता आई है।

समिति ने मांग की कि भारत में भी निजी शिक्षण संस्थानों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए तथा सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार करते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अनिवार्य की जाए। इससे शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।

अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

ज्ञापन देने वालों में किरण शर्मा (एडवोकेट, राष्ट्रीय अध्यक्ष), दीप्ति शर्मा (एडवोकेट), कीर्ति चौधरी (एडवोकेट), अल्पना (एडवोकेट), कपिल गोयल, अरुण कुमार, इस्माइल खां, सतीश कुमार (एडवोकेट), सूर्यकांत, दिनेश कांत मेहता और सुदेश शर्मा शामिल रहे।