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यूपी की धरोहर संरचनाओं पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र व राज्य को नोटिस

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यूपी – प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में धरोहर स्थलों की जर्जर स्थिति पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, पर्यटन मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य पुरातत्व विभाग से आठ सप्ताह में जवाब मांगा है।

यह आदेश अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ की याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने अधिवक्ता पवन कुमार तिवारी, ईशा कृष्ण और मानसी बचानी के साथ पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 3500 धरोहर स्थल असुरक्षित हैं, जबकि 5416 ऐतिहासिक भवनों में से केवल 421 का ही संरक्षण हो रहा है।

याचिका में तर्क दिया गया कि अधिकांश प्राचीन संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं और अतिक्रमण व अवैध निर्माण की चपेट में हैं। एएसआई के आगरा व लखनऊ सर्किल द्वारा विरासत उपनियम और विस्तृत योजनाएं तैयार न करने पर भी सवाल उठाए गए।

याचिका में सभी धरोहर स्थलों की पहचान, सूचीकरण, संरक्षण, विरासत उपनियम लागू करने और ‘विरासत संरक्षण एवं विकास बोर्ड’ के गठन की मांग की गई है।