यूपी – गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने शहरी विकास को सुव्यवस्थित और गतिशील बनाने के उद्देश्य से मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) नीति को लागू किया है। यह नियोजन अवधारणा एक ही भूखंड या भवन परिसर में आवासीय, वाणिज्यिक, कार्यालय, संस्थागत और मनोरंजन संबंधी गतिविधियों के समेकित विकास को प्रोत्साहित करती है। प्राधिकरण के अनुसार तेजी से बढ़ती जनसंख्या, सीमित भूमि संसाधन और बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए यह मॉडल प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है।
मिश्रित उपयोग विकास से नागरिकों को आवास, रोजगार, खरीदारी, शिक्षा और मनोरंजन जैसी सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होंगी, जिससे आवागमन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्राधिकरण ने बताया कि महायोजना-2031 के अंतर्गत चिन्हित क्षेत्रों, स्वीकृत ले-आउट के मिश्रित उपयोग भूखंडों, 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों तथा टीओडी जोन में यह व्यवस्था लागू होगी। मधुबन आवासीय योजना के पॉकेट ए और बी में मिश्रित उपयोग भूखंडों के पंजीकरण 25 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक किए जाएंगे तथा 18 मार्च को नीलामी के माध्यम से आवंटन होगा।
विकास मानकों के तहत मुख्य उपयोग न्यूनतम 33 प्रतिशत तथा अन्य उपयोग अधिकतम 66 प्रतिशत तक अनुमन्य होगा। भवन ऊंचाई और न्यूनतम भूखंड क्षेत्रफल पर कोई प्रतिबंध नहीं रखा गया है। अन्य प्रावधान महायोजना-2031 और भवन उपविधि के अनुसार लागू रहेंगे।






