
नई दिल्ली। लोधी रोड स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में मेवाड़ यूनिवर्सिटी द्वारा “धार्मिक आशंकाओं के उन्मूलन के प्रयास” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि नफरत से नफरत समाप्त नहीं होती, इसके लिए किसी को पहल करनी होगी और वह पहल हमें स्वयं करनी चाहिए।

सेमिनार में विभिन्न धर्मों से जुड़े 21 विद्वानों ने अपने विचार रखे। उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन और मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थियों की सर्वधर्म प्रार्थना से हुआ। स्वागत भाषण में कुलाधिपति अशोक कुमार गदिया ने कहा कि कुछ व्यक्तियों के कृत्यों के आधार पर पूरे समुदाय को दोषी ठहराना मानवता के विरुद्ध है।

ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने धर्म को मानव निर्मित सकारात्मक सामाजिक व्यवस्था बताया। मौलाना कल्बे रुशैद रिजवी ने धर्म के मूल भाव को समझने पर बल दिया। एचडी थॉमस ने धर्म के अति प्रभाव पर चिंता जताई। योग भूषण महाराज ने मानवता, करुणा और अहिंसा को धर्म का आधार बताया। दिलवर सिंह ने मजहब के नाम पर संघर्षों की आलोचना की। आचार्य येशी फुंत्सोक ने आध्यात्मिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि सलमान खुर्शीद ने संवाद से सांप्रदायिक टकराव दूर करने पर जोर दिया। अध्यक्षता महेशचंद्र शर्मा ने की। सेमिनार में मोहम्मद फैज खान, रेहान अख्तर, गीता सिंह, शफकत खान, अरविंद मंडलोई, उमर इलियासी, सचिन बुधोलिया, आईएम कुदुसी, सुशील पंडित सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे। संचालन चेतन आनंद ने किया और आभार अलका अग्रवाल ने व्यक्त किया।







