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भरत के चरित्र से कर्तव्य और त्याग की सीख लेनी चाहिए में : विजय कौशल महाराज

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यूपी – गाजियाबाद। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामकथा के षष्ठम दिवस शुक्रवार को श्रद्धा और भावुकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने रामकथा के छठे दिन राजा दशरथ की मृत्यु तथा चित्रकूट में राम-भरत मिलाप का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

विजय कौशल महाराज ने कहा कि भरत का चरित्र नि:स्वार्थ प्रेम, कर्तव्यपरायणता और आदर्श भ्रातृ प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि हमें अपने पूर्व कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, इससे राजा दशरथ भी नहीं बच सके। श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप के कारण राम के वनवास के वियोग में राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए।

कथा के दौरान भरत-राम मिलाप, दशरथ का विलाप और भरत का त्यागपूर्ण आचरण उपस्थित जनसमूह को गहराई से छू गया। महाराज ने बताया कि भरत ने माता कैकेयी की योजना को अस्वीकार करते हुए राजपाट ठुकराया और श्रीराम को वापस लाने चित्रकूट गए। श्रीराम के वचन पालन के कारण अयोध्या लौटने से इंकार करने पर भरत उनकी पादुकाएं लेकर लौटे और 14 वर्षों तक तपस्वी जीवन जीते हुए राजकाज संभाला।

संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि हमें भरत के चरित्र से कर्तव्य और त्याग की सीख लेनी चाहिए। शनिवार को श्रीरामकथा का सातवां एवं अंतिम दिवस होगा। मंगलमय परिवार ने श्रद्धालुओं से अधिक संख्या में पहुंचने का आग्रह किया है।