यूपी – गाजियाबाद। कविनगर रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार, गाजियाबाद द्वारा आयोजित भव्य श्री राम कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति, करुणा और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल, ताड़का-वध, मिथिला वैभव, पुष्प-वाटिका तथा राम-सीता विवाह की मंगल भूमिका का भावपूर्ण वर्णन किया।

संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन हर युग के मानव के लिए धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का पथ प्रदर्शक है। बालक राम की लीलाओं के वर्णन से श्रोता भाव-विभोर हो उठे। ताड़का-वध प्रसंग के माध्यम से उन्होंने अधर्म के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया, जिस पर पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
मिथिला नगरी और पुष्प-वाटिका का काव्यात्मक वर्णन श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद से भर गया। राम-सीता विवाह को धर्म, प्रेम और त्याग का पवित्र संगम बताया गया।
आयोजन स्थल को अयोध्या की तर्ज पर सजाया गया है, जहां रामलला के दर्शन, श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी प्रदर्शनी और पुंगनूर गौ-माता का सान्निध्य श्रद्धालुओं को विशेष अनुभूति दे रहा है। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंगलमय परिवार ने सभी से आगामी कथा में सपरिवार सहभागी बनने का आग्रह किया।







