यूपी – गाजियाबाद। कनावनी पुलिया के पास शुक्रवार 16 जनवरी 2026 को चार साल के मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इस हमले में बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आईं और डॉक्टरों को उसके सिर में 36 टांके लगाने पड़े। यह मामला रैबीज की तीसरी कैटेगरी में आता है, जिसमें टांके लगाने से पहले काटने की जगह को साबुन से अच्छी तरह साफ कर वहां एंटी रैबीज सीरम (RIG) लगाना अनिवार्य होता है।
परिजनों के अनुसार जिस अस्पताल में बच्चे का इलाज हुआ, वहां यह आवश्यक सीरम नहीं लगाया गया, जिससे बच्चे की जान खतरे में बताई जा रही है। चिकित्सकीय मानकों के अनुसार यदि 24 घंटे के भीतर एंटी रैबीज सीरम नहीं लगाया गया तो बच्चे को रैबीज होने की आशंका बढ़ जाती है, जो लगभग 100 प्रतिशत जानलेवा बीमारी है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हर्ष अस्पताल के डॉ बी.पी. त्यागी ने मानवीय पहल करते हुए बच्चे को निःशुल्क एंटी रैबीज सीरम लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पताल तुरंत सीरम नहीं लगाता है तो हर्ष अस्पताल में यह सुविधा फ्री उपलब्ध कराई जाएगी।
बच्चे की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और इलाज पर हो रहे खर्च से बेहद परेशान है। इस घटना ने एक बार फिर गाजियाबाद नगर निगम की स्ट्रीट डॉग नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम भले ही कुत्तों पर कार्रवाई के दावे करता हो, लेकिन लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं कागजी खानापूर्ति की ओर इशारा करती हैं।
कनावनी इलाके में हुई इस घटना से स्थानीय लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं और कभी भी किसी पर हमला कर सकते हैं। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद नगर निगम और सरकारी अस्पताल कितनी गंभीरता दिखाते हैं और कब तक ठोस कार्रवाई होती है।







