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श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धूमधाम से हुई चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना
    

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यूपी – गाजियाबाद चातुर्मास के दौरान कविनगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में झंडारोहण का कार्यक्रम किया गया उसके उपरांत परमपूज्य भावलिंगी संत,आचार्य श्री 108 विमर्श सागर महामुनिराज का ससंग (23 पिच्छी)मुनिराजों एवं अनेकों साध्वियों के साथ साथ जैन समाज के सैकड़ों भक्तों के साथ धूमधाम से बैंड बाजों सहित श्री दिगम्बर जैन मंदिर कविनगर से पैदल विहार करते हुए सुबह पं० दीनदयाल उपाध्याय सभागार में पहुँचे जहाँ पर आचार्य विमर्श सागर महाराज का ससंघ जयकारे के साथ स्वागत किया गया और भक्तों ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके उपरांत सभी साधु संतों को मंचासीन किया गया और यही पर मंगल कलश स्थापना एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव के मांगलिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ 3 चित्रों का अनावरण के पश्चात दीप प्रज्वलन कर किया गया। उसके उपरांत स्थानीय चातुर्मास समिति और सकल जैन समाज द्वारा चातुर्मास हेतु आचार्य श्री के ससंघ श्री फल भेंट किया गया। मंगल कलश जम्बू प्रसाद जैन अशोक जैन रवि जैन आलोक जैन सुधीर जैन सुशील डीके जैन विवेक जैन संदीप ने लिया। परम पूज्य आचार्य  विमर्श सागर महाराज का मंगल पूजन किया गया। इस अवसर पर एटा, दिल्ली, जबलपुर, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तरांचल आदि प्रदेशों से सैकड़ों की संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए। जैन समाज द्वारा सभी भक्तगणों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के उपरांत श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर कविनगर में बड़े ही उत्साह के साथ मंगल कलश स्थापना की गई।
     
मंगल कलश स्थापना और गुरू पूर्णिमा के अवसर पर बोलते हुए आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति का स्थायित्व बनाए रखने में जैन संतों की अहम भूमिका है। भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में चरितार्थ करने वाले जैन संत निरंतर आत्म कल्याण के साथ साथ प्राणिमात्र के कल्याण की भावना भी अपने अंदर संजोये रहते है यही कारण है कि जैन दिगंबर संत वर्षाकाल के प्रारंभ होते ही एक स्थान पर ठहर जाते हैं जिससे किसी भी सूक्ष्म से सूक्ष्म जीभ की भी उनके द्वारा हिंसा न हो।

उन्होंने कहा कि यह महावीर भगवान का शासन चल रहा है इसलिए हम सभी की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो महाराज श्री को संयम रखने में अपनी अहम भूमिका निभाएँ। हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हम लोग भगवान महावीर के शासन में पैदा हुए हैं। जैन धर्म अनादि से अनंत है जिसका कोई अंत नहीं वह अनादि होता है और जिसका आदि है उसका अंत भी है। अपने आचरण व व्यवहार से जितने भी पंथ पैदा हुए हैं उनका अंत निश्चित है अधिकतर पंथों का बँटवारा पूजा पद्धति को लेकर हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारा सभी गाजियाबाद वासियों को सौ प्रतिशत आशीर्वाद है। अब सभी लोगों को तन मन धन से चतुर्मास को सफल बनाकर धर्म की प्रभावना को बढ़ाना है।

इस अवसर पर मंच संचालन रिषभ जैन ने किया। कार्यक्रम में जम्बू प्रसाद जैन अध्यक्ष, प्रदीप जैन महामंत्री, प्रदीप जैन कोषाध्यक्ष, विवेक जैन, रिषभ  जैन, अजय जैन, पंकज जैन, धर्मेन्द्र जैन, सतपाल जैन, सुनील जैन, साधना जैन, रेखा जैन, स्नेहा जैन, संगीता जैन, नीतू जैन स्वाती जैन, साधना जैन, पुष्पा जैन, शशि जैन, विभा जैन, विनय जैन, नरेंद्र जैन, गोपाल जैन, दीपक जैन, प्रखर जैन, तरस जैन, संजय जैन, संदीप जैन, राजू जैन, डीके जैन, राजेंद्र जैन, नीतीश जैन, सत्यम, जीवेन्दर् जैन, अशोक जैन, आर सी जैन, राजू जैन का विशेष योगदान रहा।