यूपी – नोएडा |भारतीय औद्योगिक प्रबंधन परिषद (ICIM) ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) आधारित बॉयलरों और डीजी सेट्स पर OCEMS/PTZ कैमरा अनिवार्य किए जाने को लेकर कड़ा विरोध जताया है। परिषद ने इसे तकनीकी रूप से अनुचित, आर्थिक रूप से दंडात्मक और सरकार की स्वच्छ ईंधन नीति के विपरीत बताया है। ICIM ने प्रधानमंत्री कार्यालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ICIM के चेयरमैन सतेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उद्योगों को डीज़ल और फर्नेस ऑयल जैसे प्रदूषणकारी ईंधनों से हटाकर पीएनजी जैसे स्वच्छ ईंधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया था। पीएनजी से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन शून्य, पार्टिकुलेट मैटर अत्यंत कम तथा NOx स्तर मानकों से काफी नीचे रहता है। फ्ल्यू गैस पारदर्शी और धुएँ रहित होती है। ऐसे में स्वच्छ प्रणाली पर महंगे निरंतर उत्सर्जन निगरानी उपकरण थोपना वैज्ञानिक दृष्टि से निराधार है।
उन्होंने कहा कि CPCB के मानकों में भी पीएनजी आधारित इकाइयों के लिए आवधिक मैनुअल स्टैक परीक्षण को पर्याप्त माना गया है। इसके बावजूद OCEMS अनिवार्यता लागू करना नियामकीय विरोधाभास को दर्शाता है। OCEMS की स्थापना पर प्रति चिमनी 8 से 12 लाख रुपये तक का खर्च आता है, साथ ही वार्षिक कैलिब्रेशन, कनेक्टिविटी और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ भी जुड़ता है, जो विशेष रूप से MSME इकाइयों के लिए गंभीर समस्या है।
सतेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि पीएनजी इकाइयों को गलत तरीके से प्रदूषणकारी श्रेणी में शामिल कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे स्वच्छ ईंधन अपनाने वाले उद्योग अनावश्यक नियामकीय कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। उन्होंने OCEMS आपूर्तिकर्ताओं द्वारा मनमाने दाम वसूले जाने पर भी चिंता जताई।
ICIM ने मांग की है कि पीएनजी आधारित इकाइयों को OCEMS/PTZ कैमरा अनिवार्यता से तत्काल मुक्त किया जाए, सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को स्पष्ट निर्देश जारी हों और पीएनजी इकाइयों के लिए CPCB मानकों के अनुरूप आवधिक मैनुअल मॉनिटरिंग की अनुमति दी जाए।






