यूपी – गाजियाबाद। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के संरक्षण और काम के अधिकार की रक्षा के लिए गाजियाबाद से “मनरेगा बचाओ संग्राम” नामक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई। गाजियाबाद जिला एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन की रूपरेखा 10 जनवरी 2026 को जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रस्तुत की गई।
प्रेस नोट में बताया गया कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है। कानून के अनुसार 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य है। मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, जिससे प्रतिवर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है, पलायन में कमी आती है और गांवों में टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण होता है। इस योजना से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्यदिवसों का लगभग 60 प्रतिशत रही है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रस्तावित VB-GRAM-G अधिनियम को मनरेगा की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि यह काम की वैधानिक गारंटी को कमजोर करता है, पंचायतों और ग्राम सभाओं की भूमिका सीमित करता है तथा मजदूरी में केंद्र सरकार के अंशदान को घटाकर श्रमिकों और राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। इसी के विरोध में कांग्रेस कार्य समिति के निर्णय के तहत यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया गया है।
अभियान के तहत 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास, 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क, 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना, 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना, 7 से 15 फरवरी तक लखनऊ में विधानसभा घेराव और 16 से 25 फरवरी तक क्षेत्रीय एआईसीसी सदस्यों द्वारा रैलियां आयोजित की जाएंगी। जिला अध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा कि गाजियाबाद जिला एवं महानगर कांग्रेस कमेटी अभियान के हर चरण में व्यापक जनसंपर्क और प्रभावी मीडिया संवाद सुनिश्चित करेगी।







