यूपी – गाजियाबाद, 8 दिसंबर 2025। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी, वीर चक्र एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष—कोरवा, ने कहा कि सरकारी नीतियाँ ही लोगों की सांसें छीन रही हैं। उनका कहना है कि दिल्ली-NCR की हवा सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा जहरीली हो चुकी है, और यह प्राकृतिक नहीं बल्कि नीतिगत विफलता का परिणाम है।
त्यागी ने हालिया फैसले का उल्लेख करते हुए बताया कि अरावली की लगभग 90% भूमि को “अनक्लासिफाइड” घोषित कर खनन और निर्माण के लिए खोल दिया गया है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद खतरनाक है। अरावली, दिल्ली-NCR को धूल भरी आंधियों से बचाने, भूजल रिचार्ज कराने और जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अरावली पर वर्षों से गैर-कानूनी खनन, अवैध कब्ज़ा और पहाड़ियों को काटने की कार्रवाई चल रही है, लेकिन इस फैसले ने संकट को और गहरा कर दिया है।
त्यागी के अनुसार, समस्या केवल पर्यावरण विनाश की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि आम नागरिकों को अपने साझा संसाधनों पर मालिकाना हक नहीं मिल रहा। साझा चरागाह, जंगल, पहाड़, नदियाँ और वेटलैंड्स सरकारी और कॉर्पोरेट हितों के बीच खत्म होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम सभाओं, स्थानीय समुदायों और इकोलॉजिकल काउंसिलों को अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक संसाधनों का संरक्षण संभव नहीं।
उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ की समुदायें अपनी चराई भूमि, ग्लेशियर और पारंपरिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं तथा छठी अनुसूची की मांग कर रही हैं, लेकिन इसका विरोध किया जा रहा है।
त्यागी ने गाजियाबाद को भी इसके लिए चेताया, जहाँ वायु प्रदूषण पर दशक भर से सुझाव दिए जाने के बावजूद प्रशासन उदासीन बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए नेतृत्व और जनजागरूकता दोनों आवश्यक हैं, और मीडिया की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है।







