यूपी – गाजियाबाद, शहर के बीचों-बीच गंदे नाले के किनारे लगाए जा रहे रविवार बाजार को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी आक्रोश है। नई बस्ती क्षेत्र में हर रविवार लगने वाला यह बाजार अब केवल नाले के किनारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गलियों तक फैल चुका है। सिकंदराबाद, दिल्ली, सीलमपुर, मेरठ, बुलंदशहर सहित दूर-दूर से आने वाले लोग यहां दुकानें लगाकर भीड़ बढ़ा रहे हैं, जिससे लोगों में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आने-जाने वाले व्यक्तियों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। कुछ दिन पहले कवि नगर क्षेत्र में रैपीडो बाइक चालक द्वारा की गई आपराधिक घटना ने लोगों में दहशत फैलाई है। ऐसे में भीड़भाड़ वाले अस्थायी बाजारों में किसी भी प्रकार की घटना होने पर आरोपियों को पहचानना मुश्किल हो जाएगा।
व्यापारियों का कहना है कि यह बाजार पहले नवयुग मार्केट में लगता था, जहां व्यवस्थित रूप से व्यापार होता था, लेकिन अब अनियंत्रित तरीके से लग रहे रविवार बाजार ने उनकी दुकानदारी पर भारी असर डाला है। ऑनलाइन बिक्री ने पहले ही व्यापारियों की कमर तोड़ दी है, ऐसे में असंगठित बाजार और तिब्बत बाजार जैसी अस्थाई मंडियों ने उनकी आय पर और प्रभाव डाला है। व्यापारी सप्ताहभर इंतजार करते हैं कि रविवार को व्यापार अच्छा होगा, लेकिन अवैध बाजार उनकी ग्राहकी छीन ले रहे हैं।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम अतिक्रमण के नाम पर पक्के व्यापारियों को परेशान करता है, जबकि अस्थाई बाजारों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती। पेट बाजार में सुरक्षा गार्ड और पुलिस तैनात रहती है, लेकिन यहां व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं है।
युवा प्रदेश महामंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल राजू छाबड़ा ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध बाजारों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।







