यूपी – गाजियाबाद, मॉडल टाउन ईस्ट स्थित 133-बी पर मंगलवार को घरेलू कामगार समिति ने प्रेस वार्ता आयोजित की। राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा समर्थित यह समिति समाज के सबसे निचले तबके—घरेलू नौकरानियों—को शोषण से बचाने और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से पंजीकृत की गई है। समिति का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए घरेलू कामगार समिति के मुख्य संरक्षक तथा राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने बताया कि वर्ष 2008 और 2010 में घरेलू कामगारों के लिए कानून बनाए गए थे। इसके बाद 2017 में घरेलू कामगार बिल प्रस्तुत किया गया, जो आज तक एक्ट का रूप नहीं ले पाया है। घरेलू नौकरानियों को कम वेतन, अधिक कार्यभार और कई बार शारीरिक शोषण जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
समिति की अध्यक्षा मोनिका कश्यप ने कहा कि घरेलू कामगार समाज के सबसे कमजोर वर्ग से आते हैं और असंगठित क्षेत्र में होने के कारण उनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। उन्होंने कहा कि समिति सरकार से तीन प्रमुख मांगें करती है—
- घरेलू कामगारों को कम से कम Unskilled Worker के रूप में मान्यता दी जाए।
- 2017 के बिल के अनुसार घरेलू नौकरानियों का अनिवार्य पंजीकरण किया जाए।
- न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए।
समिति की सचिव आरती देवी, उपाध्यक्ष नीतू कश्यप और कोमल कुमारी ने कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद घरेलू कामगारों का वेतन वर्षों से स्थिर है, जबकि उच्च वर्ग अपनी पूंजी पर ब्याज तक पाता है।
प्रियंका देवी, आशा देवी, मंजू देवी, गुडिया देवी, मधु, प्रियंका पासवान, शहनाज और पिंकी ने कहा कि गरीबों के टैक्स से ही समाज का बड़ा वर्ग शिक्षित होकर आगे बढ़ता है, इसलिए उच्च वर्ग का दायित्व है कि वे घरेलू कामगारों के प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार करें।







