नैतिकता के बिना धार्मिकता नहीं : आचार्य प्रसन्न सागर महाराज
यूपी – गाजियाबाद, तरुणसागर तीर्थ धाम, मुरादनगर में आयोजित प्रेस वार्ता में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि नैतिकता के बिना धार्मिकता संभव नहीं। यदि व्यक्ति में नैतिकता नहीं है और वह स्वयं को धार्मिक कहता है, तो यह केवल भ्रम है। उन्होंने कहा कि आज मानव सेवा विलुप्त होती जा रही है। लोग वही सुनना और देखना पसंद करते हैं जो उन्हें अच्छा लगे, लेकिन मां-बाप, भाई-बहन, साधु-संत और पीड़ितों की सेवा को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और स्वयं को मानवसेवी बताना मात्र दिखावा बनकर रह गया है।
आचार्य ने कहा कि जब देश में साहित्य फुटपाथ पर और जूते-चप्पल शोरूम में बिकते हैं, तो स्पष्ट है कि लोगों का रुझान किस ओर है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा भिखारी वह है जिसके पास भगवान के लिए समय नहीं है। आज लोग मंदिरों में भक्ति के लिए नहीं, बल्कि भय या अपनी इच्छाएं पूर्ण कराने के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संत मंदिर से मोक्ष की ओर बढ़ते हैं जबकि सांसारिक जीवन घर से श्मशान की ओर जाता है। जीवन सुधारने के लिए व्यर्थ चीजों का त्याग आवश्यक है, क्योंकि मनुष्य अपने कर्मों का फल स्वयं भोगता है।
तरुणसागर तीर्थ धाम इन दिनों भगवान महोत्सव (26–30 नवंबर 2025) के अवसर पर अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान है। इस महोत्सव की मुख्य उपलब्धि—100 दिनों में निर्मित भव्य गुफा मंदिर—का लोकार्पण 27 नवंबर को होगा, जिसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में धाम पधारेंगे।
आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने अपने तप और साधना से अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सम्मेद शिखर पर 557 दिन का मौन एकांतवास और मात्र 61 दिन आहार लेकर सिंह निष्कीड़ित व्रत साधना पूर्ण की। उनके 1,30,000 किलोमीटर के अहिंसा संस्कार पदयात्रा ने समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा और नैतिकता के जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें वियतनाम विश्वविद्यालय, स्वर्णिम विश्वविद्यालय तथा ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
प्रेस वार्ता में सुनील जैन, नमीजी जैन, दीपेश जैन, अरुण जैन, संजय जैन और अजय जैन उपस्थित रहे।







