डॉ संजीव शर्मा —भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री, आयरन लेडी इंदिरा गांधी का जन्मदिन 19 नवंबर को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। आजादी के बाद एकीकृत भारत को मजबूत और सुरक्षित रखने की दिशा में इंदिरा गांधी ने असाधारण योगदान दिया और अंततः राष्ट्र की एकता की रक्षा में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।
इंदिरा गांधी का नेतृत्व उन विरासतों से उपजा था, जो स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय एकीकरण के परिणामस्वरूप भारत को मिली थीं। 1971 के युद्ध में उनके दृढ़ संकल्प ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सामरिक जीत भारत को दिलाई। पाकिस्तान के विभाजन और बांग्लादेश के निर्माण ने धर्म आधारित राष्ट्रवाद की अवधारणा को चुनौती देते हुए दक्षिण एशिया का सामरिक मानचित्र बदल दिया। एक करोड़ शरणार्थियों को उनके घर वापस पहुँचाने का वादा पूरा कर उन्होंने दुनिया में भारत की कूटनीति की शक्ति सिद्ध की।
राष्ट्रीय विकास की दिशा में इंदिरा गांधी ने हरित और श्वेत क्रांतियों को गति दी, जिससे भारत अमेरिकी खाद्य निर्भरता से मुक्त हुआ और खाद्यान्न–दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बना। बैंक राष्ट्रीयकरण का ऐतिहासिक निर्णय ग्रामीण भारत को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हुआ। 1974 के परमाणु परीक्षण ने भारत को परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाई।
सामंतवाद के विशेषाधिकार समाप्त करने, संविधान संशोधनों के माध्यम से गरीबों के हित सुरक्षित करने और सिक्किम के विलय जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने भारत की एकता और मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खालिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाते हुए उन्होंने राष्ट्र की अखंडता को सर्वोपरि रखा और अंततः उसी संघर्ष के क्रम में शहीद हो गईं।
इंदिरा गांधी के शब्द—“मेरे खून का एक-एक कतरा देश के काम आएगा”—आज भी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने हुए हैं। राष्ट्र उनकी जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।







