यूपी – गाजियाबाद, उत्तर भारत, विशेषकर NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर हर्ष ईएनटी हॉस्पिटल के चेयरमैन और प्रसिद्ध ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. बी.पी. त्यागी ने अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि NCR की हवा अब केवल प्रदूषित नहीं, बल्कि इंसानी जीवन के लिए ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रही है। पौधों की पत्तियों पर बढ़ती धूल के कारण CO₂ का अवशोषण रुक रहा है, जिससे वायुमंडल में CO₂ का स्तर और PM 2.5 की मात्रा मिलकर एक गहरा स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही है।
डॉ. त्यागी के अनुसार घरों और ऑफिसों में CO₂ का सामान्य स्तर 400–800 PPM होना चाहिए, जबकि NCR में कई स्थानों पर यह कई गुना अधिक पाया जा रहा है। बढ़ा हुआ CO₂ स्तर सिरदर्द, चक्कर, बेचैनी, सांस फूलना, मानसिक थकान और दिल की धड़कन बढ़ने जैसे शुरुआती लक्षण देता है। 1400 PPM पर सोचने-समझने की क्षमता 25% और निर्णय क्षमता 50% तक कमजोर हो जाती है। CO₂ न अवशोषित होने से पौधे ऑक्सीजन नहीं छोड़ पाते, जिससे ऑक्सीजन की कमी और CO₂ की अधिकता मोटापे तक को जन्म दे रही है।
उन्होंने कहा कि 2500–5000 PPM पर सुस्ती, भारीपन और दिमागी धुंध बढ़ती है, जबकि 5000 PPM से ऊपर की स्थिति जानलेवा मानी जाती है, जिसमें बेहोशी, लकवा, फेफड़ों की विफलता और स्ट्रोक तक हो सकता है।
सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए डॉ. त्यागी ने कहा, “अगर लोग स्वच्छ हवा की ओर नहीं गए, तो अगले 10 साल में NCR की आबादी एक चौथाई कम हो जाएगी। यह जहरीली हवा इंसान को अंदर से धीरे-धीरे खत्म कर रही है।”
उन्होंने वायु प्रदूषण से बचाव के लिए घर–ऑफिस में एयर प्यूरीफायर, एग्जॉस्ट सिस्टम, वेंटिलेशन, प्रदूषण के पीक समय में बाहरी गतिविधियाँ कम करने और बच्चों–बुजुर्गों के लिए विशेष सतर्कता जैसे उपाय जरूरी बताए।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि हवा साफ नहीं हुई तो स्वास्थ्य संकट इतना बड़ा हो जाएगा कि अस्पताल भी कम पड़ जाएंगे। “अभी चेत जाएँ, वरना आने वाली पीढ़ियाँ इसकी भारी कीमत चुकाएँगी।”







