यूपी – गाजियाबाद श्री सुल्लामल रामलीला में शनिवार को सुबाहु वध से लेकर अहिल्या उद्धार और फुलवारी तक की लीला का मंचन हुआ। वही शुक्रवार को रामलीला के कलाकारों ने ताड़का वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया। भीषण युद्ध में ताड़का का अंत हुआ। राक्षसों के संहार के साथ ही पंडाल में श्रीराम के जयकारे लगने लगे।

ताड़का वध के बाद विश्वामित्र जब यज्ञ करने लगते हैं तो सुबाहू मारीच अन्य राक्षसों के साथ यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने आता है तब श्री राम मारीच को छोड़ कर सभी राक्षसों को मार देते हैं और मारीच को भगवान श्री राम बिना नोक वाला बाण मार कर सौ योजन दूर फेक देते हैं। ऋषि विश्वामित्र के साथ श्रीराम लक्ष्मण सीता स्वयंवर में जाते हैं जहां रास्ते में अहिल्या की पत्थर की मूर्ति दिखती है, जिसका वह उद्धार करते हैं। वहां से जनकपुरी प्रस्थान करते हैं। जनकपुरी में जब वह लक्ष्मण और विश्वामित्र के साथ नगर भ्रमण करते हुए फुलवारी पहुंचते हैं, वहां सीता जी श्रीराम जी को देखती हैं। वहां दोनों एक दूसरे पर मोहित हो जाते हैं। सीता जी मां गौरी की पूजा करते हुए उनसे वर के रूप में श्रीराम जी को मांगती हैं और माता उन्हें आशीर्वाद देती है।

शाम को मंत्री नरेंद्र कश्यप रामलीला मैदान पहुंचे जहां उन्होंने रामलीला कमेटी के सभी पदाधिकारियों से मुलाकात कर अच्छे आयोजन और मेले को नया रूप देने के लिए बधाई दी। मेले में लंदन थीम पर एक स्थान बनाया गया है जहां जाकर बच्चे व बड़े जाकर सेल्फी ले सकेंगे। रामलीला मेले में इस तरह का स्थान पहली बार बनाया गया है।
लीला स्थल पर प्रमुख रूप से अध्यक्ष अजय बंसल, उस्ताद अशोक गोयल, महामंत्री नरेश अग्रवाल, सुधीर गोयल मोनू, संजीव मित्तल, अनिल चौधरी, राजेन्द मित्तल मेंदी वाले, राकेश स्वामी, नंदकिशोर शर्मा, शशिकांत भारद्वाज, विपिन गर्ग, यशवर्द्धन गुप्ता, राजेश बंसल, सौरभ जयसवाल, मोहित मित्तल, शिवांक गर्ग, अशोक शर्मा, सुनील कुमार, अंकित सैनी, नितिन मित्तल, तुषार बंसल, भानु महाशय, प्रदीप गर्ग, विजय गोयल, राधवेंद्र शर्मा, पार्षद नीरज गोयल, उपस्थित रहे।




