रावण की कठिन तपस्या से देवता हुए वश में
यूपी – गाजियाबाद शनिवार को श्री रामलीला समिति राजनगर में रावण वेदवती संवाद, श्रवण कुमार की लीला तथा श्री राम सहित चारों भाइयों के जन्म के प्रसंगों का मंचन किया गया। मंचन से पूर्व समिति के पदाधिकारियों ने श्रीहरि का विधिवत पूजन किया।

रावण के प्रसंग के संदर्भ में सीता जी के पूर्व जन्म के रूप में वेदवती के प्रसंग का चित्रण किया गया। वेदवती ॠषि कुशध्वज की अत्यंत सौन्दर्यवान कन्या थीं। रावण उन पर मोहित था और उसने वेदवती को अपने व्यवहार से मलिन कर दिया था। तब वेदवती ने उसे श्राप दिया था कि अगले जन्म में मैं ही तुम्हारी मृत्यु का कारण बनूंगी। अपने पुनर्जन्म में उन्होंने माता सीता के रूप में जन्म लिया जिनके कारण रावण का अंत हुआ। आज लीला में रावण के जन्म के साथ ही उसके भाइयों कुम्भकरण तथा विभीषण के जन्म का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। रावण ने कठिन तपस्या करके सभी देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली। इसके बाद वह लंका का राजा बन जाता है और उसका विवाह मंदोदरी से हो जाता है। इसके साथ ही आकाशवाणी का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। साथ ही मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की कथा भी प्रस्तुत की गई, जिसमें श्रवण कुमार को अन्जाने में मार देने के कारण राजा दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप उसके माता-पिता देते हैं। तब निस्संतान राजा दशरथ को लगता है कि इनके श्राप के कारण पुत्र की प्राप्ति होगी।
इसके बाद श्री राम के चारों भाइयों का जन्म होता है और अयोध्या में चारों ओर धूमधाम और खुशियां बिखरी हुई हैं। राजा दशरथ की तीनों पत्नियां अपने पुत्रों की अठखेलियां देख देख कर निहाल हो रही हैं। आज मंच पर पहली बार सीता जी के जन्म का मंचन भी किया गया।
इस मौके पर मुख्य रूप से समिति के संस्थापक एवं संरक्षक जितेन्द्र यादव तथा नरेश सिंघल, अध्यक्ष जयकुमार गुप्ता, महामंत्री दीपक मित्तल, कोषाध्यक्ष आर के शर्मा, मेला प्रबंधक एस एन अग्रवाल, स्वागताध्यक्ष योगेश गोयल मौजूद रहे।




